गाजियाबाद के शहरी विकास में नया अध्याय: GDA ने नगर निगम को सौंपीं अपनी प्रमुख योजनाएं और STP

Rashtriya Shikhar
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A New Chapter in Ghaziabad’s Urban Development: GDA Hands Over Its Key Plans and STP to the Municipal Corporation IMAGE CREDIT TO NAGAR NIGAM

आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार) |

शहर के बेहतर प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्राधिकरण ने अपनी प्रमुख विकसित आवासीय योजनाओं, महत्वपूर्ण सड़क संपत्तियों और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को विधिवत रूप से नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत स्वर्णजयंतीपुरम, कर्पूरीपुरम (बी-ब्लॉक), प्रताप विहार की भाऊराव देवरस योजना (केए और केबी ब्लॉक) तथा गोविन्दपुरम (सी.पी. ब्लॉक) जैसी बड़ी कॉलोनियों की कमान अब नगर निगम के हाथों में होगी। इसके साथ ही राजनगर एक्सटेंशन मुख्य बंधा रोड और पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मधुबन बापूधाम स्थित 56 एम.एल.डी. क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का भी विधिवत हैंडओवर कर दिया गया है।

शहर की सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता: संपत्ति हस्तांतरण से नागरिक-केंद्रित विकास को बल

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हस्तांतरण की यह प्रक्रिया जीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त की उपस्थिति में दोनों विभागों की टीमों के बीच आपसी सहमति और विधिवत हस्ताक्षर के साथ संपन्न हुई। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए संबंधित परिसंपत्तियों के तकनीकी अभिलेख, ड्राइंग और संचालन-अनुरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज निगम को सौंप दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इन क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के संचालन और विकास कार्यों में कोई बाधा न आए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहर की सेवाओं को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

66 करोड़ का निवेश: शहर के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को अगले स्तर पर ले जाने की योजना

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इन योजनाओं के बेहतर सुदृढ़ीकरण और भविष्य में रखरखाव के लिए जीडीए ने नगर निगम को कुल 66 करोड़ 32 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है। वित्तीय सहयोग की यह राशि दो चरणों में प्रदान की जाएगी, जिसमें लगभग 33.16 करोड़ रुपये फरवरी माह में और शेष 33.16 करोड़ रुपये मार्च माह में नगर निगम को दिए जाएंगे। इस बजट का उपयोग संबंधित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, सीवरेज एवं जल निकासी प्रबंधन, हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा। विशेष रूप से 56 एम.एल.डी. एसटीपी के निगम के अधीन आने से शहर की सीवरेज निस्तारण क्षमता में सुधार होगा और जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। जीडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण का लक्ष्य केवल नई योजनाओं का विकास करना ही नहीं है, बल्कि विकसित परिसंपत्तियों को सक्षम निकायों को सौंपते हुए एक स्थायी और उत्तरदायी शहरी प्रबंधन प्रणाली सुनिश्चित करना है। इस समन्वित प्रयास से न केवल शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम जनता को भी बेहतर और त्वरित नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

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