पिलखुवा/हापुड़ (शिखर समाचार)
सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन हापुड़ के अंतर्गत संचालित सरस्वती कॉलेज आफ फार्मेसी में भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय की समिति पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण समिति (CPCSEA) के सहयोग से 28 फरवरी को “पशु मुक्त परीक्षण की नवाचार विधियाँ” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य औषधीय अनुसंधान में नैतिकता, वैज्ञानिक नवाचार और आधुनिक वैकल्पिक परीक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करना रहा।
भव्य शुभारंभ एवं अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के महाप्रबंधक एन. वरदराजन ने की। इस अवसर पर चिकित्सा संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आर. के. सहगल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मेजर जनरल जी. एस. अहलूवालिया, नर्सिंग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. मनोहरी, मानव संसाधन प्रबंधक एल. रुबावती तथा लेखा प्रबंधक डी. सरवणन सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
सरस्वती कॉलेज आफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. नितिन कुमार ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं सम्मान पत्र देकर स्वागत किया तथा संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों और भावी शोध योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में पशु मुक्त परीक्षण विधियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और संस्थान इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
पशु मुक्त परीक्षण की आवश्यकता और नियामक ढांचा
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कार्यशाला में बताया गया कि जटिल मानव रोगों के उपचार हेतु विकसित की जा रही नई दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परंपरागत रूप से विभिन्न पशु प्रजातियों पर परीक्षण किए जाते रहे हैं, जिनमें कई बार पशुओं को कष्टदायक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे में वैज्ञानिक और नैतिक दृष्टि से वैकल्पिक परीक्षण पद्धतियों का विकास अत्यंत आवश्यक है।
भारत में पशु परीक्षण केवल उन्हीं संस्थानों में किए जा सकते हैं जिन्हें पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण समिति से मान्यता प्राप्त है। समिति समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित करती है कि पशुओं पर होने वाले प्रयोग यथासंभव पीड़ारहित हों तथा उनके स्थान पर प्रयोगशाला आधारित, कोशिका संस्कृति, संगणकीय प्रतिरूपण और अन्य पशु मुक्त तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए।
विशेषज्ञों के विचार और सक्रिय सहभागिता
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कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में समिति के प्रतिनिधि डॉ. विवेक त्यागी, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के आणविक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सुब्रजीत विश्वास तथा स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के फार्मेसी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शोकिंद्र कुमार ने अपने विचार रखे।
डॉ. विवेक त्यागी ने भारत में पशु प्रयोगों के नियामक ढांचे, समिति की भूमिका और कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रोफेसर डॉ. सुब्रजीत विश्वास ने विषाक्तता परीक्षण, पूर्व नैदानिक औषधि खोज और जोखिम मूल्यांकन में नवाचार आधारित वैकल्पिक तकनीकों की उपयोगिता पर बल दिया। प्रोफेसर डॉ. शोकिंद्र कुमार ने पशु अनुसंधान में नैतिक और वैज्ञानिक संतुलन स्थापित करने के विभिन्न उपायों की विस्तार से जानकारी दी।
राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के निदेशक, शिक्षक तथा बड़ी संख्या में शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। संवादात्मक सत्रों में प्रतिभागियों ने पशु मुक्त परीक्षण तकनीकों, नियामक अपेक्षाओं और भविष्य की शोध संभावनाओं पर विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए पूरी टीम को बधाई दी।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार और नेहा वर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव प्रोफेसर डॉ. शिव कुमार गुप्ता और डॉ. निधि त्यागी ने प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह, डॉ. सुप्रियो मैटी, डॉ. रश्मि शर्मा, दीपेश, प्रशांत सारस्वत, मनीष, खुर्शीद, विशाल, अजय, अनुपमा, योगेश, मोहित, संजय, अनुज, सुवलिहा और शादाब सहित समस्त टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह कार्यशाला औषधीय अनुसंधान में नैतिकता और नवाचार के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई, जिसने शोधार्थियों और शिक्षकों को भविष्य की वैज्ञानिक चुनौतियों के प्रति नई दृष्टि प्रदान की।
