ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)।
उत्तर प्रदेश के जेवर क्षेत्र में देश का पहला डिस्प्ले ड्राइवर अर्धचालक संयोजन और परीक्षण संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह अत्याधुनिक इकाई HCL Technologies और Foxconn के संयुक्त उद्यम इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही है। यह परियोजना India Semiconductor Mission तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से जमीन पर उतारी जा रही है। इसे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक पहल माना जा रहा है।
वैश्विक अर्धचालक श्रृंखला में भारत की मजबूत भागीदारी
प्रस्तावित संयंत्र उन्नत अर्धचालक पैकिंग, जांच और जोड़ाई कार्य पर केंद्रित होगा। इसके शुरू होने से भारत की वैश्विक अर्धचालक मूल्य श्रृंखला में भागीदारी मजबूत होगी और देश उच्च तकनीकी विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा। यह पहल मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप है तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देगी। इससे चिप आधारित उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होने की संभावना है। यह देश की पहली डीडीआईसी अर्धचालक संयोजन एवं परीक्षण सुविधा होगी, जो बड़े पैमाने पर निर्यात क्षमता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की उत्पादन इकाई के रूप में कार्य करेगी।
आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को मिलेगा बल
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/grand-cxo-meet-2025-held-at-its-mohan-nagar/
आर्थिक दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अनुमान है कि पूर्ण क्षमता पर संचालन के बाद यह इकाई हर वर्ष भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का योगदान दे सकती है। इससे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा और प्रदेश निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। संयंत्र के माध्यम से लगभग तीन हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। स्थानीय युवाओं को उच्च तकनीकी प्रशिक्षण देने, कौशल विकास कार्यक्रम चलाने और उद्योग आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना भी शामिल है।
अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/discussion-on-ghaziabad-in-the-review-meeting/
परियोजना के अंतर्गत अर्धचालक अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने के लिए उत्कृष्टता केंद्र, अनुसंधान केंद्र तथा संगणकीय अनुकरण प्रयोगशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह कार्य स्थानीय शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से किया जाएगा, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को व्यवहारिक अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी और वैश्विक अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाएगी। जेवर और आसपास का क्षेत्र अर्धचालक व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के नए औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित हो सकता है, जिसे उत्तर प्रदेश को अर्धचालक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में पहला बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
