मेरठ रेंज में यक्ष ऐप से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, 1.06 लाख अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

Rashtriya Shikhar
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In Meerut range, crackdown on criminals to tighten via YAKSH app; digital records of 1.06 lakh offenders prepared IMAGE CREDIT TO POLICE

मेरठ (शिखर समाचार)। आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मेरठ परिक्षेत्र पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा लॉन्च किए गए यक्ष (YAKSH) ऐप के जरिए मेरठ रेंज में अपराधियों का व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया है। इस ऐप के माध्यम से अब तक रेंज के चार जिलों में 1,06,092 अपराधियों का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है, जिनमें से लगभग 70 हजार अपराधियों का सत्यापन भी पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही रेंज के 5863 ग्राम और मोहल्लों का 100 प्रतिशत डेटा भी ऐप में फीड कर दिया गया है, जिससे बीट स्तर पर पुलिस की जवाबदेही तय होने के साथ अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

यक्ष ऐप का उद्देश्य और कार्यान्वयन

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मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने वर्ष की शुरुआत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों, राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों को यक्ष ऐप के उद्देश्य और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए थे। निर्देशों के क्रम में जघन्य और सनसनीखेज अपराधों की रोकथाम के लिए अपराधियों का शत प्रतिशत डेटा ऐप में दर्ज करने तथा उनका नियमित सत्यापन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

ग्राम और मोहल्लों का 100 प्रतिशत डेटा

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पुलिस के अनुसार मेरठ रेंज में कुल 5863 ग्राम और मोहल्लों का डेटा ऐप में दर्ज किया गया है। इनमें:

  • मेरठ जिले के 2461
  • बुलंदशहर के 2170
  • बागपत के 435
  • हापुड़ के 797 ग्राम और मोहल्ले शामिल हैं।

इनका फीडिंग प्रतिशत 100 प्रतिशत है।

अपराधियों का रिकॉर्ड और सत्यापन

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मेरठ रेंज में अब तक कुल 1,06,092 अपराधियों का विवरण यक्ष ऐप में दर्ज किया गया है। जिलावार विवरण इस प्रकार है:

  • मेरठ: 42,677 (सत्यापन 22,500)
  • बुलंदशहर: 34,909 (सत्यापन 31,300)
  • बागपत: 10,411 (सत्यापन 8,260)
  • हापुड़: 18,095 (सत्यापन 7,970)

ऐप की विशेषताएँ और तकनीकी क्षमता

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यक्ष ऐप की खास बात यह है कि इसके जरिए किसी भी जिले में अपराध करने वाले अपराधी का रिकॉर्ड दर्ज होते ही संबंधित थाने को तुरंत सूचना मिल जाएगी। बीट व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र के टॉप 10 अपराधियों का चयन पारदर्शी और डेटा आधारित प्रक्रिया से किया जा सकेगा।

एआई आधारित फेसियल रिकग्निशन और वॉयस सर्च जैसी सुविधाओं के जरिए संदिग्ध अपराधियों की पहचान करना आसान होगा और अपराधों के खुलासे में तेजी आएगी। यदि कोई अपराधी नाम बदलकर या फरार होकर छिपने की कोशिश करता है तो भी चेहरे के मिलान की तकनीक से उसकी पहचान संभव होगी।

स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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जघन्य या सनसनीखेज अपराध की घटना होने पर यक्ष ऐप के डेटाबेस से संभावित अपराधियों की पहचान और उनकी अद्यतन स्थिति की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी, जिससे पुलिस कार्रवाई और अधिक तेज और प्रभावी होगी।

डीआईजी कलानिधि नैथानी का कहना है कि यक्ष ऐप स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित सत्यापन और बीट स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित होने से अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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