दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि पर “समर्पण” विषयक पुस्तक का भव्य लोकार्पण, एकात्म मानववाद को जनचेतना से जोड़ने का आह्वान

Rashtriya Shikhar
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Grand Launch of the Book on “Dedication” on Deendayal Upadhyaya’s Death Anniversary, Calls to Connect Integral Humanism with Public Awareness IMAGE CREDIT TO REPORTER

नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में रहे राष्ट्र चिंतक और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी के मालवीय समिति भवन में एक गरिमामय समारोह आयोजित कर उनके जीवन, दर्शन और राष्ट्रनिष्ठ समर्पण पर आधारित पुस्तक समर्पण दीनदयाल उपाध्याय का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम प्रेरणा दिवस के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न सामाजिक, वैचारिक और सार्वजनिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। अतिथियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके विचारों और कार्यों को स्मरण किया। समारोह में प्रमुख रूप से डॉ महेश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, वी सतीश, राष्ट्रीय संगठक भाजपा तथा रवीन्द्र माधव साठे, सभापति एवं राज्य मंत्री स्तर, महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल मौजूद रहे। सभी अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति प्रतीक भेंट कर अभिनंदन किया गया।

दीनदयाल उपाध्याय की वैचारिक धरोहर जीवंत: युवा लेखक चन्दन कुमार की प्रेरक पुस्तक का विमोचन

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मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ सिंह ने किया। उन्होंने वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और पुस्तक की विषयवस्तु तथा उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में डॉ महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह अवसर केवल श्रद्धांजलि का नहीं बल्कि विचारों के पुनर्स्मरण और नई पीढ़ी तक वैचारिक धरोहर पहुंचाने का भी है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर गंभीर अध्ययन आधारित पुस्तक तैयार करना अपने आप में महत्वपूर्ण कार्य है और लेखक चन्दन कुमार ने कम आयु में यह प्रयास कर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
पुस्तक के लेखक चन्दन कुमार ने कहा कि यह कृति उनके लिए एक वैचारिक साधना के समान रही। उन्होंने बताया कि पुस्तक लिखने की प्रेरणा उन्हें दीनदयाल उपाध्याय के जीवन संघर्ष, संगठन क्षमता और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान की सोच से मिली। पुस्तक में उनके व्यक्तित्व, वैचारिक आधार, संगठन निर्माण की शैली और राष्ट्र जीवन पर प्रभाव का विस्तृत विवरण संकलित किया गया है।

एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता: नई पुस्तक ने सामाजिक न्याय और समग्र विकास की राह दिखाई

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वक्ताओं ने कहा कि एकात्म मानववाद आज भी विकास की ऐसी धारा प्रस्तुत करता है, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के बीच संतुलन का विचार निहित है। यह दर्शन केवल राजनीतिक अवधारणा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समग्र विकास का मार्गदर्शक सूत्र है। पुस्तक को इस विचारधारा को सरल और व्यवस्थित रूप में समझाने वाला उपयोगी ग्रंथ बताया गया।
समारोह में तरुण चुघ, राष्ट्रीय महामंत्री भाजपा, हरीशंकर सिंह, रमाकांत पांडे सहित अनेक गणमान्यजन और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंत में सभी ने राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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