दिल्ली (शिखर समाचार) हिंदू शिक्षा समिति द्वारा संचालित और विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध डीएवी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 गांधी नगर दिल्ली में सोमवार को गुरु पर्व उत्सव, सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती, हरियाणा दिवस तथा आ. हर्ष की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर एक विशाल सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। विद्यालय प्रांगण में हुए इस कार्यक्रम में श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
विचारों की संगम: शिक्षा, समाज और संस्कार पर मंथन
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अरविंद सिंह लवली, अध्यक्ष यमुना पार विकास बोर्ड व विधायक गांधी नगर उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता सतीश शर्मा (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत बौद्धिक प्रमुख) थे, जबकि विशेष वक्ता के रूप में गणित प्रवक्ता सुनील जैन और राकेश सहरावत ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष नरेश शर्मा, प्रबंधक गिरीजेश रस्तोगी और प्रधानाचार्य दिनेश चंद शर्मा भी मंच पर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ तनुजा कसाना और बलविंदर कौर ने दीप प्रज्वलन से किया। मंच संचालन का दायित्व प्रियंका अग्रवाल, रेणु जोशी और आशुतोष ने निभाया। सभागार को वसु वर्मा और नेहा गुप्ता ने आकर्षक रूप से सजाया था।
अखंड भारत के शिल्पकार: सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरित राष्ट्रनिर्माण का संदेश
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गणित प्रवक्ता सुनील जैन ने अपने संबोधन में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, उनके संघर्षों और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी, देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे। उन्होंने 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत के निर्माण की नींव रखी। किसानों की समृद्धि और सहकारिता को उन्होंने विकास का आधार माना।
समाजशास्त्र प्रवक्ता उर्वशी तोमर ने अपनी मधुर आवाज में सतगुरु मैं तेरी पतंग गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। इसके पश्चात राकेश सहरावत ने हरियाणा दिवस पर बोलते हुए राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा वह भूमि है जहाँ गीता का उपदेश हुआ, जहाँ महाभारत और पानीपत की तीन निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ी गईं। उन्होंने कहा कि दूध-दही का खाना, वही हरियाणा इस कहावत में राज्य की सादगी, मेहनत और समृद्धि की झलक मिलती है।
गुरुओं की शिक्षा से प्रेरित बनो—साहस, सेवा और समानता के पथ के पथिक
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मुख्य अतिथि अरविंद सिंह लवली ने छात्रों को गुरु नानक देव और गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने चमकौर साहिब के युद्ध में असाधारण साहस और त्याग का परिचय दिया तथा निस्वार्थ सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया। खालसा पंथ की स्थापना के माध्यम से उन्होंने समानता, भाईचारे और सेवा की भावना को जन-जन तक पहुँचाया।
लवली ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे देश की एकता और आर्थिक मजबूती के प्रतीक थे। उन्होंने पटेल के बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल का भी स्मरण किया, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विधायक ने गुरु पर्व, सरदार पटेल जयंती और हरियाणा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
राष्ट्रहित और समभाव का संदेश—सरदार पटेल से लेकर गुरु नानक तक की प्रेरणा
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सतीश शर्मा ने अपने उद्बोधन में सरदार पटेल के जीवन दर्शन और राष्ट्रीय एकता की भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पटेल आरएसएस जैसे संगठनों को राष्ट्रहित में कार्यरत मानते थे और उन्हें समाज सेवा के लिए प्रोत्साहित करने की बात करते थे। उन्होंने गुरु नानक देव की यात्राओं और उनके समभाव, समानता और सेवा के संदेशों को आज के समाज में अपनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय अध्यक्ष नरेश शर्मा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल वास्तव में भारत की राजनीति के लौह स्तंभ थे। उन्होंने एकता, दृढ़ता और निष्ठा का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह और गुरु नानक देव की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहाँ पूरे सभागार में देशभक्ति और एकता का भाव गूंज उठा।
