मोदीनगर के श्री गुरु धाम मंदिर में गुरुजी पंडित बृजमोहन शर्मा की दसवीं पुण्यतिथि पर भजन, सेवा और महाभंडारे का विराट आयोजन

Rashtriya Shikhar
4 Min Read
Grand Event of Bhajans, Service, and Mahabhandaara Held at Shri Guru Dham Temple in Modinagar on 10th Death Anniversary of Guruji Pandit Brijmohan Sharma IMAGE CREDIT TO श्री गुरु धाम मंदिर

मोदीनगर (शिखर समाचार) मोदीनगर शहर में स्थित श्री गुरु धाम मंदिर परिसर में मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन परम पूजनीय बड़े गुरुजी पंडित बृजमोहन शर्मा जी की दसवीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई। 11 फरवरी 2026 को आयोजित इस विशेष अवसर पर भजन कीर्तन, गुरु वंदना और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे। पूरा वातावरण भक्ति रस, मंत्रोच्चार और गुरु स्मरण से सराबोर दिखाई दिया। आयोजन छोटे गुरुजी महाराज पंडित सुनील शर्मा जी तथा उनके अनुज संजय गौड़ के सानिध्य में संपन्न हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा को नमन करते हुए सहभागिता निभाई।

गुरु स्मृति उत्सव: भजन, सेवा और समाज कल्याण से मंदिर परिसर में जीवंत आध्यात्मिक वातावरण

ALSO READ:https://www.amarujala.com/delhi-ncr/ghaziabad/cold-wave-today-yellow-alert-for-fog-again-from-tomorrow-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-802437-2026-01-15?src=top-subnav

कार्यक्रम की शुरुआत गुरु चरण वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद भजन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिनमें गुरु महिमा, मानव सेवा और धर्म मार्ग के संदेश प्रमुख रहे। भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कई श्रद्धालु भावुक भी हुए और गुरु स्मृति में नमन करते दिखाई दिए। मंदिर परिसर को फूलों और सजावटी वस्त्रों से विशेष रूप से सजाया गया था, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई।
इस मौके पर छोटे गुरुजी महाराज पंडित सुनील शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु धाम मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि जनसेवा का केंद्र है। यहां से मानव कल्याण और समाज हित के कार्य निरंतर संचालित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर रक्तदान शिविर, विद्यार्थियों के लिए चित्रकला स्पर्धा, जरूरतमंदों को सहायता वितरण और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उद्देश्य यही है कि धर्म केवल अनुष्ठान तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की भलाई से जुड़कर जीवंत बने।

गुरु परंपरा का संदेश: सेवा, आशा और मार्गदर्शन से श्रद्धालुओं को मिलती मानसिक शांति

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/grand-cxo-meet-2025-held-at-its-mohan-nagar/

उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा का मूल संदेश है पीड़ित के साथ खड़े होना, निराश को आशा देना और मानवता की सेवा को सर्वोच्च मानना। इसी भावना के साथ मंदिर परिवार निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी सेवा कार्यों में आगे आने का आह्वान किया।
पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और जीवन से जुड़े प्रश्न लेकर भी पहुंचे। उन्होंने छोटे गुरुजी महाराज से मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस धाम में आने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की उलझनों का समाधान भी मिलता है। लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि यहां आने वाला व्यक्ति भारी मन लेकर आता है और हल्के तथा प्रसन्न मन से लौटता है।

भजन और भंडारे से जुड़ी आस्था: पुण्यतिथि समारोह ने दिखाई सेवा और सामाजिक एकता की मिसाल

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/trans-hindon-cyber-police-40-crore-recovered/

भजन संध्या के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए सेवादारों की अलग-अलग टोलियां लगाई गई थीं। भोजन वितरण, जल व्यवस्था, बैठने की सुविधा और आवागमन को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे। पूरे आयोजन में अनुशासन और सेवा भाव स्पष्ट दिखाई दिया।
स्थानीय श्रद्धालुओं और बाहर से आए भक्तों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक और सेवा आधारित कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं। गुरु स्मृति में आयोजित यह पुण्यतिथि समारोह आस्था, सेवा और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।

2 3
Share This Article
Leave a comment