अरणि गौड़
(यूके संवाददाता)
लंदन (शिखर समाचार)। स्वीडन की चर्चित पर्यावरण एवं सामाजिक न्याय कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में आयोजित फ़िलिस्तीन समर्थन प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई, जब प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शित संदेशों को लेकर क़ानून उल्लंघन की आशंका जताई गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान दिखाई गई एक तख्ती में ऐसे संगठन का समर्थन दर्शाया गया, जिस पर ब्रिटेन में पहले से प्रतिबंध लागू है, इसी आधार पर सख़्त क़ानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कदम उठाया गया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विवाद: ग्रेटा थुनबर्ग समेत कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ग्रेटा थुनबर्ग शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं और हाथ में फ़िलिस्तीन समर्थन से जुड़ा संदेश लिए खड़ी थीं। हालांकि पुलिस का तर्क है कि संदेश की प्रकृति और उसके निहितार्थ क़ानून के दायरे में आते हैं, इसलिए हिरासत आवश्यक थी। मौके पर मौजूद कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को भी सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाने और प्रतिबंधित विचारधारा के समर्थन के आरोप में पकड़ा गया।
घटना के बाद प्रदर्शन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और भीड़ को नियंत्रित करते हुए स्थिति को सामान्य बनाया गया। इस कार्रवाई के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राष्ट्रीय क़ानूनों की सीमाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज़ हो गई है। समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति जताना नागरिकों का मूल अधिकार है, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि क़ानून के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है। फिलहाल ग्रेटा थुनबर्ग से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है और आगे की क़ानूनी कार्रवाई स्थानीय नियमों व प्रक्रियाओं के अनुरूप तय की जाएगी।
