गाजियाबाद (शिखर समाचार)
आईटीएस गाजियाबाद और राधे श्याम चैरिटेबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 3 दिसंबर 2025 की दोपहर 3 बजे आईटीएस मोहन नगर गाज़ियाबाद के द्रोणाचार्य ऑडिटोरियम में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। एसआईआर द स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न फॉर द करेक्ट लिस्ट एंड द राइट वोट विषय पर आधारित यह कार्यक्रम शिक्षकों, पीजीडीएम (2025–27) और एमसीए के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची के अद्यतन और उसकी संवैधानिक अहमियत को समझाना था।
आईटीएस गाजियाबाद में विशेष सत्र: उद्योग और न्याय क्षेत्र के दिग्गजों की मौजूदगी में सम्पन्न कार्यक्रम
यह सत्र आईटीएस के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में पूर्व सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, डॉ. ख्याति मिश्र, आईटीएस स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय कुमार तथा आईटीएस गाजियाबाद के निदेशक डॉ. सुनील पांडे बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके माध्यम से एस.आई.आर. से जुड़ी ज्ञानप्रद, उपयोगी एवं प्रतीकात्मक अनुभूतियों को रेखांकित किया गया। इसके पश्चात पूरे सभागार में वंदे मातरम का सामूहिक गान हुआ, जिसने देशभक्ति और एकजुटता का वातावरण निर्मित किया। अर्पित चड्ढा ने सभी अतिथियों का पुष्प-गुच्छ एवं स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया।
राष्ट्रव्यापी मतदाता सूची सुधार अभियान: SIR से चुनावी तैयारी और वोटर शुद्धिकरण का मजबूत कदम
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/extensive-review-of-mission-shakti-zero/
मुख्य सत्र में अतिथियों ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के महत्व की विस्तृत व्याख्या की। बताया गया कि यह प्रक्रिया देश की मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने का संवैधानिक प्रयास है, ताकि तेजी से हो रहे शहरीकरण, जनसंख्या परिवर्तन और प्रवासन के प्रभाव मतदाता सूची में सही रूप से परिलक्षित हो सकें। आयोग का उद्देश्य नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना, मौजूदा रिकॉर्ड को सही करना, डुप्लिकेट या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को हटाना और आगामी 2026 के तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम एवं पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों को मजबूत करना है। इसमें बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे अहम बताई गई, क्योंकि वही जमीनी स्तर पर सत्यापन और दस्तावेज़ जांच को सुनिश्चित करते हैं।
सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि भले ही निर्वाचन आयोग एसआईआर को अपनी नियमित संवैधानिक जिम्मेदारी बताता है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह प्रक्रिया देश में बहस का विषय बनी हुई है। विपक्षी दल इंडिया गठबंधन, टीएमसी, डीएमके सहित कई अन्य ने आशंका व्यक्त की है कि यह अभियान अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का रूप ले सकता है, जिससे गरीब, अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी समुदायों के वोट काटे जाने की आशंका बढ़ती है। उनका तर्क है कि दस्तावेज़ी दिक़्क़तों के कारण कई पात्र मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। इस पर निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची संशोधन उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और यह पूरी तरह पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
आईटीएस गाजियाबाद में लोकतंत्र शिक्षा सत्र: छात्रों ने जाना मतदाता सूची और स्वस्थ लोकतंत्र का महत्व
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/municipal-commissioner-held-a-review-meeting/
आईटीएस गाजियाबाद में आयोजित इस व्यापक सत्र ने छात्रों को प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक पहलुओं की समग्र समझ दी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एक शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची ही किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला होती है। समापन सत्र में डॉ. अजय कुमार ने सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक फोटो सत्र के साथ हुआ, जिसने इस ज्ञानवर्धक दिवस को ऊर्जा, सहभागिता और जागरूकता के संदेश के साथ यादगार बना दिया।
