चंडीगढ़ (शिखर समाचार)
ज्योतिष आचार्य एवं वास्तु सलाहकार बावा जी (लुधियाना) के अनुसार वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी, मंगलवार से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, क्योंकि ग्रहों की स्थिति संवेदनशील और उग्र रहती है, जिससे शुभ कार्यों का अपेक्षित फल प्रभावित हो सकता है।
होलाष्टक का प्रभाव
बावा जी ने बताया कि 24 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक होलाष्टक दोष सक्रिय रहेगा। उत्तर भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में इसका विशेष पालन किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस समय असुर राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दी थीं, और होलिका दहन के दिन अधर्म का अंत हुआ। इसी कारण यह अवधि मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ मानी जाती है।
किन कार्यों से परहेज करें
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- विवाह और सगाई
- नए घर या दुकान में प्रवेश
- संपत्ति या वाहन क्रय
- बच्चों के संस्कार जैसे नामकरण और मुंडन
बावा जी के अनुसार इस समय ग्रहों के उग्र प्रभाव से निर्णय क्षमता और भाग्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।
शुभ कार्य और भक्ति के अवसर
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हालांकि, यह अवधि भक्ति, साधना और दान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दौरान निम्नलिखित क्रियाएं फलदायी हैं:
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करना
- भगवान विष्णु और महादेव की उपासना
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप
- घर की साफ-सफाई कर सकारात्मक वातावरण बनाना
विशेष जानकारी
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- 3 मार्च 2026 को होलिका दहन की रात्रि में चंद्र ग्रहण भी होगा, इसलिए सूतक काल के नियमों का पालन आवश्यक होगा।
- होलाष्टक केवल निषेध का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का पावन अवसर है, जो अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है।

