हापुड़ (शिखर समाचार) थाना धौलाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां प्रेम विवाह करने वाले युवक को अपनी बीमार पत्नी की मृत्यु के बाद उसके शव को दफनाने के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ीं। परिजनों और ग्रामीणों के विरोध के कारण युवक को काफी अपमान और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। अंततः धौलाना पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए हस्तक्षेप किया और पुलिस सुरक्षा में महिला के शव को कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कराया।
प्रेम विवाह के कारण परिवारों और ग्रामीणों का विरोध
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/special-intensive-review-program-meeting/
प्राप्त जानकारी के अनुसार धौलाना क्षेत्र के गांव नंदपुर निवासी शाहनवाज ने लगभग चार वर्ष पूर्व परिवार की मर्जी के बिना मुस्कान से प्रेम विवाह किया था। प्रेम विवाह को लेकर उस समय दोनों परिवारों में नाराजगी थी, जो समय बीतने के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। मुस्कान पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से ग्रसित थी और उपचार के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गई।
अंतिम संस्कार के दौरान युवक को झेलनी पड़ी अपमानजनक स्थिति
ALSO READ: https://rashtriyashikhar.com/sihani-gate-police-solved-a-showroom-theft/
पत्नी की मृत्यु से आहत शाहनवाज जब उसके शव को दफनाने के लिए गांव के कब्रिस्तान पहुंचा तो कुछ ग्रामीणों ने प्रेम विवाह का हवाला देते हुए विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ एकत्र हो गई और शव को कब्रिस्तान में दफनाने से रोक दिया गया। इसके बाद वह पत्नी के पैतृक गांव पहुंचा, लेकिन वहां भी मृतका के परिजनों ने विवाह को स्वीकार न करने की बात कहते हुए शव को दफनाने से इंकार कर दिया।
पुलिस ने मानवीय पहल करते हुए कराया अंतिम संस्कार
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/trans-hindon-cyber-police-40-crore-recovered/
घटना की सूचना मिलने पर थाना धौलाना पुलिस तत्काल सक्रिय हुई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों से वार्ता की, लेकिन जब समाधान नहीं निकला तो कानून व्यवस्था बनाए रखने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पुलिस ने स्वयं पहल की। पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा में मृतका के शव को कब्रिस्तान ले जाया गया और विधि विधान के अनुसार सुपुर्द ए खाक कराया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अंतिम संस्कार या दफन क्रिया से रोकना कानूनन उचित नहीं है और ऐसे मामलों में प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि व्यक्तिगत निर्णयों के कारण जीवन भर की नाराजगी को मृत्यु के बाद भी ढोना कितना उचित है। प्रेम विवाह को लेकर समाज में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद मानवीय संवेदनाएं सर्वोपरि होनी चाहिए। धौलाना पुलिस की तत्परता से युवक को न्याय मिला और प्रशासन की मानवीय भूमिका भी सामने आई।
