पालमपुर में नन्ही प्रतिभाओं के मार्गदर्शक बने आचार्य बख्शीश सिंह बावा, बच्चों को दिया आत्मविश्वास और संस्कारों का संदेश

Rashtriya Shikhar
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Acharya Bakshish Singh Bawa became the guide of little talents in Palampur, gave the message of confidence and values to the children IMAGE CREDIT TO बावा

पालमपुर (शिखर समाचार)
पालमपुर में आयोजित किड्स वर्सेटिला आइकन ऑफ इंडिया नृत्य एवं मॉडलिंग प्रतियोगिता में ज्योतिषाचार्य और शिक्षाविद बख्शीश सिंह बावा कार्यक्रम के केंद्र बिंदु के रूप में रहे। बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें सही दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में उनका मार्गदर्शन, आशीर्वाद और प्रेरक विचार आयोजन की आत्मा बने रहे। गौरबिका पैलेस में संपन्न इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए बच्चों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, वहीं बख्शीश सिंह बावा की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

दीप प्रज्वलन से प्रेरणा तक: बच्चों की प्रतिभा को मंच देने का संकल्प

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कार्यक्रम का शुभारंभ बख्शीश सिंह बावा द्वारा दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे सही मंच देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और उनके व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की रुचियों को समझें और उन पर अनावश्यक दबाव न डालें।

पूरे कार्यक्रम के दौरान बख्शीश सिंह बावा बच्चों का उत्साहवर्धन करते नजर आए। उन्होंने प्रतिभागी बच्चों से संवाद कर उन्हें अनुशासन, मेहनत और संस्कारों के महत्व को समझाया। कार्यक्रम में उन्होंने न केवल बच्चों को बल्कि आयोजन से जुड़े कलाकारों, प्रशिक्षकों और आयोजकों को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया, जिससे उपस्थित लोगों में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

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इस अवसर पर शो आयोजक जग्गी औलख ने कहा कि बख्शीश सिंह बावा का मार्गदर्शन आयोजन के लिए प्रेरणास्रोत रहा। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के पचास से अधिक बच्चों ने भाग लिया, जबकि विशेष वॉक में तीस से अधिक बच्चों की भागीदारी रही। बच्चों की प्रस्तुतियों को निखारने में कोरियोग्राफर एवं प्रशिक्षक अयांश शर्मा और अमनदीप शर्मा की भूमिका भी सराहनीय रही।

कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने बख्शीश सिंह बावा के विचारों और बच्चों के प्रति उनके स्नेह की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे मार्गदर्शकों की आवश्यकता है जो बच्चों को केवल सफलता ही नहीं, बल्कि संस्कार और सही जीवन मूल्यों का भी ज्ञान दें। कुल मिलाकर यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया सार्थक कदम साबित हुआ, जिसमें आचार्य बख्शीश सिंह बावा की भूमिका प्रेरक और मार्गदर्शक के रूप में विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

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