आईएमएस गाजियाबाद परिसर में शोध रूपांतरण और व्यावसायिक उपयोग पर विशेष शैक्षणिक गोष्ठी आयोजित

Rashtriya Shikhar
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Special Academic Seminar on Research Translation and Commercialization Organized at IMS Ghaziabad Campus IMAGE CREDIT TO IMS

गाजियाबाद (शिखर समाचार) आईएमएस गाजियाबाद यूनिवर्सिटी कोर्सेज परिसर में अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की ओर से शिक्षकों के लिए एक विशेष शैक्षणिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शोध कार्य को प्रयोगिक उपयोग में लाने और उसे उद्यम के रूप में विकसित करने के तरीकों पर विस्तार से मंथन हुआ। गोष्ठी का मुख्य विषय शोधकर्ता से उद्यम संस्थापक बनने की यात्रा तथा शोध के रूपांतरण और व्यावसायिक उपयोग पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में शिक्षकों को यह समझाया गया कि प्रयोगशाला और कक्षा तक सीमित ज्ञान को समाज और बाज़ार से जोड़कर किस प्रकार उपयोगी उत्पाद और सेवाओं में बदला जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रसेल मर्ज रहे, जो नेचको एडवाइजरी और ब्रिस्बेन स्ट्रेटेजी वेंचर्स से जुड़े हैं और ऑस्ट्रेलिया में मुख्य कार्यकारी पद पर कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में होने वाला शोध यदि सही दिशा और योजना के साथ आगे बढ़े तो वह नए उद्योगों और नवाचार आधारित उपक्रमों को जन्म दे सकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं को समस्या आधारित अध्ययन, बौद्धिक संपदा संरक्षण और उद्योग सहभागिता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

शोध से समाज तक: नवाचार, उद्यम और वैश्विक दृष्टि का सशक्त संगम

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गोष्ठी का शुभारंभ आईएमएस समूह के जनरल सेक्रेटरी सीए (डॉ.) राकेश छारिया और निदेशक प्रो. (डॉ.) जसकिरण कौर ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। अपने संबोधन में राकेश छारिया ने कहा कि आज के दौर में केवल शोध पत्र प्रकाशित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शोध का प्रत्यक्ष सामाजिक और औद्योगिक लाभ भी दिखाई देना चाहिए। इस प्रकार के ज्ञान सत्र शिक्षकों को नवाचार और उद्यम स्थापना की दिशा में सक्रिय बनाते हैं।
जसकिरण कौर ने कहा कि संस्थान शोध, नवाचार और नवउद्यम पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। बाहरी देशों के अनुभवी विशेषज्ञों से संवाद होने पर शिक्षकों की सोच का दायरा बढ़ता है और उन्हें वैश्विक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है।

शोध से स्टार्टअप तक: विचार, संवाद और परिवर्तन की प्रेरक यात्रा

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मुख्य वक्ता रसेल मर्ज ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्रत्येक शोधकर्ता में उद्यम स्थापित करने की क्षमता मौजूद होती है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन, योजना और व्यावहारिक दृष्टिकोण की है। जब शोध को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जोड़ा जाता है, तभी वह आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनता है।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अनेक प्रश्न पूछे और शोध के व्यावसायिक उपयोग, उद्योग सहयोग, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा नवउद्यम स्थापना की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। अंत में आभार ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन किया गया।

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