हापुड़ (शिखर समाचार) शहर के सनातन धर्म सभा परिसर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन का दृश्य भक्ति और आनंद से परिपूर्ण रहा। धर्मपरायण लाला हुकम चंद के परिवार द्वारा आयोजित कथा में कथावाचक हार्दिक भाई जोशी ने जब भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पवित्र विवाह प्रसंग का वर्णन किया तो कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो उठे। वातावरण में राधे कृष्ण और जय रुक्मिणी कृष्ण के जयघोष गूंज उठे।
रुक्मिणी का प्रेम पत्र: बाल्यकाल से ही हृदय में विराजे कृष्ण
कथावाचक ने बताया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी ने बाल्यकाल से ही अपने हृदय में कृष्ण को पति रूप में स्वीकार किया था, परंतु उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से करने का निश्चय किया। यह जानकर रुक्मिणी अत्यंत व्याकुल हो उठीं और उन्होंने सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से सात श्लोकों वाला एक पत्र कृष्ण को भेजा। उस पत्र में रुक्मिणी ने लिखा कि वे प्रतिदिन पार्वती पूजन के लिए मंदिर जाती हैं, अतः उसी अवसर पर प्रभु आकर उन्हें अपने साथ ले जाएं।
कथा के अनुसार पार्वती पूजन के समय कृष्ण ने रथ सहित विदर्भ पहुंचकर रुक्मिणी का हरण किया और उसके बाद उनके पिता ने विधिवत वैदिक रीति से विवाह संपन्न कराया। विवाह के अवसर पर देवताओं ने पुष्पवृष्टि की और इंद्रलोक तक मंगल ध्वनियाँ गूंज उठीं।
विवाह झांकी में भक्ति का उत्सव: फूलों और आरती से महक उठा मंडप
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कथा पंडाल में जब विवाह प्रसंग की झांकी सजी तो श्रद्धालु नाच उठे। फूलों की वर्षा से पूरा मंडप सुगंधित हो गया। भक्तों ने आरती उतारी और प्रसाद वितरण के साथ वातावरण पूरी तरह भक्ति रंग में रंग गया।
इस अवसर पर गोपाल अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल चोटी, अरुण गर्ग, रोहित गर्ग, दीपक गर्ग, अशोक छारिया, नरेन्द्र जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

