हापुड़ (शिखर समाचार)। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुल्क एवं सदस्य दीपक गोयल की अध्यक्षता में शनिवार को गोवंश संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में निराश्रित गोवंश के संरक्षण, भरण-पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और गो आश्रय स्थलों के प्रभावी संचालन को लेकर जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
प्रदेश में 7,700 से अधिक गो आश्रय स्थल संचालित
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7,700 से अधिक गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार की ओर से 50 रुपये प्रतिदिन की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। गो आश्रय स्थलों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 5,446 आश्रय स्थलों में 7,592 निगरानी कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से गोवंश की सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है।
निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 1,67,065 गोवंश इच्छुक गोपालकों को सौंपे जा चुके हैं। संबंधित गोपालकों को प्रत्येक गोवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से भरण-पोषण राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है।
हापुड़ में 28 गो आश्रय स्थलों में 3,731 गोवंश संरक्षित
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जनपद हापुड़ में भी गोवंश संरक्षण के लिए 28 गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 3,731 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा 893 गोपालकों ने सहभागिता योजना के तहत 1,292 गोवंश को अपनाया है। बैठक में गोवंश की सुरक्षा और गो-तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि गो आश्रय स्थलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
