गाजियाबाद (शिखर समाचार)। प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी करने वालों के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों पर पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गाजियाबाद में पहली बार इस कानून के तहत कार्रवाई की गई है।
एडिशनल सीपी राजकरन नैय्यर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बीती 3/4 नवंबर 2025 की रात अपराध शाखा की स्वाट टीम और थाना नंदग्राम पुलिस ने मेरठ रोड स्थित एक गोदाम परिसर में संयुक्त छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
गोदाम से बरामद हुई थीं 1150 पेटी कोडीनयुक्त कफ सिरप
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर गोदाम परिसर में खड़े चार ट्रकों से कुल 1150 पेटी कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद की गई थी। इसके अलावा एक क्रेटा कार, 10 मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी मोहरें भी बरामद की गई थीं।
इस मामले में थाना नंदग्राम में एनडीपीएस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर सहारनपुर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था।
लंबे समय से प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी में थे शामिल
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पुलिस जांच में सामने आया कि विभोर राणा और विशाल सिंह लंबे समय से कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी में संलिप्त थे। दोनों आरोपी संगठित तरीके से प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस के अनुसार विभोर राणा के खिलाफ सहारनपुर, लखनऊ और गाजियाबाद में कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जबकि विशाल सिंह के विरुद्ध भी लखनऊ और गाजियाबाद में आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों आरोपियों के दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका को देखते हुए पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया है।
पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत 12 माह तक रखा जा सकता है निरुद्ध
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एडिशनल सीपी ने बताया कि पीआईटी एनडीपीएस एक्ट का उद्देश्य मादक एवं मनःप्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार में शामिल व्यक्तियों को निवारक निरोध के माध्यम से रोकना है, ताकि वे भविष्य में ऐसी गतिविधियों को अंजाम न दे सकें।
उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 माह तक निरुद्ध रखा जा सकता है। यह कानून एनडीपीएस एक्ट, 1985 से अलग है। जहां एनडीपीएस एक्ट अपराध होने पर गिरफ्तारी, मुकदमा और सजा का प्रावधान करता है, वहीं पीआईटी एनडीपीएस एक्ट भविष्य में अवैध तस्करी रोकने के उद्देश्य से लागू किया जाता है।
पुलिस ने बताया कि इससे पहले अपराध शाखा द्वारा दोनों आरोपियों की करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां भी एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत फ्रीज की जा चुकी हैं।
