सूरजकुंड मेले में ‘साड़ियों का भारत’ फैशन शो ने बिखेरा भारतीय परंपरा का रंग, शिखा अजमेरा की कारीगरी ने पेश किया अद्भुत संग्रह

Rashtriya Shikhar
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At the Surajkund International Crafts Mela, the “Sarees of India” fashion show showcased the vibrant colors of Indian tradition, with Shikha Ajmera presenting an exquisite collection that highlighted her exceptional craftsmanship. IMAGE CREDIT TO कारीगरी

फरीदाबाद (शिखर समाचार)

14 फरवरी 2026 की शाम सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला के मुख्य मंच पर भारतीय संस्कृति, परंपरा और शिल्पकला की समृद्ध विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर और कलाकार शिखा अजमेरा की प्रस्तुति ‘साड़ियों का भारत – एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह फैशन शो ‘कारीगरी’ के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसका संयोजन संदेश नवलेखा द्वारा किया गया।

भव्य आगाज़ और दर्शकों की उमड़ी भीड़

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शाम लगभग साढ़े छह बजे जैसे ही मेले की मुख्य चौपाल पर कार्यक्रम शुरू हुआ, पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा। दर्शकों की भारी भीड़ ने आयोजन को यादगार बना दिया। चारों ओर कैमरों की चमक, तालियों की आवाज और पारंपरिक संगीत के बीच मंच पर उतरी मॉडलों ने अपनी प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया।

मुख्य चौपाल पर आयोजित इस फैशन शो को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। दर्शकों की भीड़ इतनी अधिक रही कि कई लोग खड़े होकर कार्यक्रम देखने को मजबूर हुए।

साड़ियों में झलकी भारत की सांस्कृतिक विविधता

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को साड़ियों के माध्यम से प्रस्तुत करना रहा। कारीगरी द्वारा प्रस्तुत संग्रह में देश के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक बुनाई, हस्तकला और शिल्प कौशल की झलक स्पष्ट दिखाई दी। मंच पर प्रदर्शित हर साड़ी अपने आप में अलग कहानी कहती नजर आई — कहीं धागों में परंपरा थी तो कहीं रंगों में भारत की आत्मा।

फैशन शो में बनारसी, कांजीवरम, बंधेज, पटोला, चंदेरी, महेश्वरी, बालूचरी, फुलकारी, गोटा पट्टी और पारंपरिक छपाई कार्य से सजी साड़ियों की आकर्षक श्रृंखला प्रस्तुत की गई। हस्तनिर्मित कढ़ाई, जरी कार्य, ब्लॉक छपाई, हथकरघा बनावट और रचनात्मक डिजाइन ने पूरे प्रदर्शन को विशिष्ट बना दिया।

परंपरा, कला और संदेश का संगम

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संग्रह की विशेषता यह रही कि साड़ियों को केवल पहनावे के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय कला और विरासत की पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक मॉडल का रूप-सज्जा भारतीय सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप तैयार किया गया। पारंपरिक आभूषण, केश-सज्जा और संतुलित चाल ने मंच पर जीवंत भारतीय चित्र उकेर दिया। मॉडलों ने आत्मविश्वास के साथ मंच पर प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इस यादगार प्रस्तुति को कैद किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल फैशन प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय हथकरघा, पारंपरिक बुनकरों और प्राचीन कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश देना भी रहा।

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सूरजकुंड मेले में आयोजित यह फैशन शो फैशन प्रेमियों के साथ-साथ संस्कृति प्रेमियों के लिए भी यादगार बन गया और भारतीय साड़ी की गरिमा तथा गौरव का उत्सव बनकर उभरा। ‘साड़ियों का भारत – एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय साड़ी केवल परिधान नहीं, बल्कि देश की आत्मा और परंपरा का प्रतीक है।

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