शामली (शिखर समाचार)
गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शामली कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान को सौंपते हुए अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई।
व्यापार समझौते के विरोध में ज्ञापन
किसानों ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र और किसान हितों के खिलाफ है। भाकियू पदाधिकारियों ने बताया कि 12 फरवरी को देशभर के किसान संगठनों द्वारा धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से इस समझौते का विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि समझौता लागू हुआ तो भारतीय कृषि व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और छोटे व सीमांत किसानों की स्थिति कमजोर होगी।
आयात और घरेलू कृषि पर प्रभाव
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ज्ञापन में कहा गया कि सोयाबीन, मक्का, गेहूं, दुग्ध उत्पाद और दालों पर आयात शुल्क में कमी होने पर अमेरिकी उत्पाद कम कीमत पर भारतीय बाजार में आएंगे। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की लड़ाई लड़ रहे भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
दुग्ध क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
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किसान यूनियन ने दुग्ध क्षेत्र को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत का दुग्ध मॉडल छोटे और सीमांत किसानों की सहकारी व्यवस्था पर आधारित है। विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आजीविका संकट में पड़ सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होगी।
अन्य खतरे और मांगें
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ज्ञापन में व्यापार संतुलन के नाम पर कृषि अनुदान में कटौती, सार्वजनिक खरीद प्रणाली की कमजोर स्थिति और बीज क्षेत्र में निजी कंपनियों के बढ़ते नियंत्रण के खतरे भी उठाए गए। किसानों ने कहा कि यह मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता से जुड़ा है। उन्होंने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को तुरंत निरस्त करने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल किसान
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प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष सांता प्रधान, मास्टर जाहिद, मोहित शर्मा, कपिल खाटियान, शोकेन्द्र सिंह, अमरपाल बालियान, विरेन्द्र, इमरान, उदयवीर सिंह, कविता चौधरी, योगेन्द्र पंवार, मुम्मकिल पहलवान सहित अनेक किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे।
