श्रम कानून वापस लेने की मांग को लेकर भाकपा ने सौंपा ज्ञापन

Rashtriya Shikhar
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CPI Submits Memorandum Demanding Withdrawal of Labour Laws IMAGE CREDIT TO BJP

नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार)

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने श्रमिक विरोधी बताए जा रहे चारों श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति में कानूनगो को सौंपा। कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के विरोध में व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी।

श्रम कानूनों के विरोध में ज्ञापन

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गुरुवार को भाकपा नेता शराफत हुसैन के नेतृत्व में बढ़ापुर क्षेत्र के कार्यकर्ता तहसील परिसर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मजदूरों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले चारों श्रम कानूनों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की गई। पार्टी का आरोप है कि इन कानूनों से श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधाओं में कमी आएगी, जिससे मजदूर वर्ग प्रभावित होगा।

हड़ताल और आंदोलन की चेतावनी

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ज्ञापन में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल के आह्वान का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से किसानों के हितों से जुड़े व्यापारिक समझौतों को रद्द करने तथा मनरेगा को पहले की तरह प्रभावी बनाने की मांग भी की गई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि श्रमिकों और किसानों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में शराफत हुसैन, हरपाल सिंह, हरकिशन सिंह, सलीम अंसारी, मोहम्मद शहजाद, जियाउल इस्लाम, असलम, जहीर कुरैशी, साजिद, मूसा और संजीव कुमार सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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