ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार) गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक गड़बड़ियों, नियमविरुद्ध नियुक्तियों, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी, छात्रावासों की बदहाल स्थिति, सुरक्षा तंत्र की कमजोरी तथा प्लेसमेंट प्रणाली की विफलता को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ग्रेटर नोएडा इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।
विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से पक्षपात और परिचय आधारित नियुक्तियों का सिलसिला चल रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर नियमों के विपरीत चयन किए जाने से शैक्षणिक वातावरण कमजोर हुआ है। परिषद का कहना है कि परीक्षा तंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है जिनके हितों का टकराव संभावित है, इससे मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ गई है।
छात्र कल्याण में पारदर्शिता और सुरक्षा की कमी पर परिषद की चेतावनी, सुविधाओं में गंभीर कमियां उजागर
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि छात्र कल्याण से संबंधित निर्णय बिना पर्याप्त पारदर्शिता के लिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर न तो खुली चर्चा हो रही है और न ही समय पर समाधान दिया जा रहा है। परिषद के अनुसार इससे छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और उनका शैक्षणिक अनुभव प्रभावित हो रहा है।
छात्रावास व्यवस्था को लेकर भी परिषद ने गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि कई छात्रावासों में स्वच्छ पेयजल, नियमित बिजली आपूर्ति, तेज गति इंटरनेट और साफ-सफाई जैसी मूल सुविधाएं भी संतोषजनक स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं। परिसर और छात्रावासों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण न होने से सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। नशीले पदार्थों के अवैध उपयोग और कारोबार की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई अपेक्षित स्तर की नहीं बताई जा रही।
छात्र मृत्यु, रोजगार और सुविधाओं पर गंभीर चिंता, परिषद ने स्वतंत्र जांच और प्रशासन सुधार की चेतावनी दी
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परिषद ने विश्वविद्यालय में घटित छात्र मृत्यु और आत्महत्या की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशील और पारदर्शी रवैया अपनाया जाना चाहिए। संगठन ने इन सभी घटनाओं की स्वतंत्र और न्यायिक स्तर की जांच कराने की मांग उठाई है ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
रोजगार अवसरों के संदर्भ में भी परिषद ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि ऊंची फीस वसूलने के बावजूद छात्रों को अपेक्षित रोजगार अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। रोजगार प्रकोष्ठ की कार्यशैली कमजोर बताई गई है। मांग की गई है कि इस प्रकोष्ठ का पुनर्गठन कर अनुभवी और सक्षम व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक रोजगार अवसर उपलब्ध हो सकें।
परिषद के प्रांत मंत्री गौरव गौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और छात्र लगातार उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि छात्र हित सर्वोपरि हैं और उन्हें नजरअंदाज करने पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान प्रांत संयोजक छात्र विकास प्रकोष्ठ अभिनव गौड़, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य आयुष, नगर मंत्री तुषार, अमरेंद्र, आदित्य, सचिन समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
