सीईएस का चतुर्थ विद्या उत्सव सम्पन्न: कक्षा से आगे बढ़कर कौशल और अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर

Rashtriya Shikhar
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CES’s Fourth Vidya Utsav Concludes: Emphasis on Skill- and Experience-Based Education Beyond the Classroom IMAGE CREDIT TO चाइल्ड एजुकेशन सोसाइटी

नई दिल्ली (शिखर समाचार) चाइल्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा आयोजित चतुर्थ विद्या उत्सव 2026 का भव्य आयोजन राजधानी में उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। बाल भारती पब्लिक स्कूल समूह की शीर्ष संस्था के इस वार्षिक शैक्षिक महोत्सव में शिक्षा को व्यवहारिक जीवन, कौशल विकास और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम में देशभर की शाखाओं से जुड़े विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक प्रत्यक्ष तथा ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
उद्घाटन अवसर पर संस्था के अध्यक्ष एवं बाल भारती विद्यालयों के चेयरमैन निखिल चानना ने कहा कि यह आयोजन शिक्षा जगत के लिए प्रेरक मंच है, जहाँ विद्यार्थियों और शिक्षकों की रचनात्मकता, प्रतिभा और नवाचार को सम्मान मिलता है। उन्होंने बताया कि संस्था के अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित 26 विद्यालयों में लगभग 37 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिन्हें 2500 समर्पित शिक्षक शिक्षित कर रहे हैं। विद्या उत्सव को उन्होंने ज्ञान, संस्कार और नवचिंतन का संयुक्त पर्व बताया।

विद्या उत्सव 2023: अनुभव और कौशल से सजी शिक्षा की नई राह

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विद्या उत्सव की परंपरा वर्ष 2023 में स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर शुरू हुई थी और तब से यह निरंतर आयोजित हो रहा है। इस वर्ष का आयोजन दो अलग-अलग सत्रों में विभाजित रहा।
पहले सत्र में शिक्षा मंत्रालय के शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से जुड़े भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजय कुमार ने कक्षाओं से इतर भविष्य निर्माण: वास्तविक संसार के कौशलों के दृष्टिकोण से अनुभव आधारित शिक्षा विषय पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने नई शिक्षा नीति के प्रमुख पक्षों को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि आज शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जीवनोपयोगी कौशल और अनुभव से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि नीति के मुख्य बिंदुओं को समझकर उन्हें व्यवहार में उतारें, तो छात्र अधिक प्रभावी ढंग से सीख सकते हैं। उनके अनुसार आज का विद्यार्थी केवल पाठ याद करने वाला नहीं, बल्कि खोज करने वाला शिक्षार्थी होना चाहिए।
इसी सत्र में शिक्षा, कौशल और तकनीकी परिवर्तन पर एक उच्च स्तरीय परिचर्चा भी आयोजित हुई। परिचर्चा का संचालन संस्था के सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार शरद अरोड़ा ने किया। इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अनुवादिनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता परियोजना के मुख्य समन्वयक बुद्ध चंद्रशेखर, सार्वजनिक नीति और कौशल विषय की विशेषज्ञ लक्ष्मी कौल, शिक्षा और उद्योग क्षेत्र की विशेषज्ञ विन्नी जौहरी तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में कौशल शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक बिस्वजीत साहा ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने बदलते शैक्षिक परिवेश में कौशल आधारित और बहु-विषयी शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

“विद्या, विवेक, विकास”: आशुतोष राणा ने आधुनिक शिक्षा में संवेदना और संस्कार का संदेश दिया

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दूसरे सत्र में फिल्म, दूरदर्शन और रंगमंच से जुड़े अभिनेता आशुतोष राणा मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने “विद्या, विवेक, विकास” विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल सूचना प्राप्त करना नहीं, बल्कि संवेदना और समझ विकसित करना भी है। उन्होंने परीक्षा आधारित व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को रटकर आगे बढ़ने के बजाय अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिलना चाहिए। यदि कोई विद्यार्थी अपनी पसंद के क्षेत्र को ही अपना व्यवसाय बनाना चाहता है, तो उसे पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर गहराई से अध्ययन करना होगा।
उन्होंने बाल भारती विद्यालय समूह की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा का संतुलित समावेश किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। शिक्षक समुदाय की भूमिका को उन्होंने राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
समारोह में दिल्ली और आसपास की शाखाओं के प्रधानाचार्य, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और प्रबंधन पदाधिकारी सहित लगभग 850 विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। अन्य शाखाओं के विद्यार्थी, अभिभावक और कर्मचारी बड़ी संख्या में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। समापन संयुक्त सचिव लक्षवीर सहगल के धन्यवाद वक्तव्य और राष्ट्रगान के साथ किया गया। पूरा आयोजन ज्ञान, कौशल और संस्कार के समन्वित उत्सव के रूप में सराहा गया।

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