हापुड़ (शिखर समाचार) पिलखुवा थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 9 के निकट स्थित मोनाड विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति वितरण में बड़े स्तर की अनियमितताओं के मामले में प्रशासन की कड़ी कार्रवाई का सामना कर रहा है। जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने विश्वविद्यालय को छात्रवृत्ति योजना से संबंधित सभी लाभों के लिए काली सूची में डालने का आदेश जारी किया है। साथ ही कथित गड़बड़ी से संबंधित धनराशि की वसूली और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलीं: सामान्य वर्ग को SC दिखाकर 53 करोड़ की ‘संदिग्ध निकासी
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि नियमित परीक्षण अभियान के दौरान छात्रवृत्ति आवंटन के अभिलेखों की जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति श्रेणी में दर्शाकर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम निकाली गई। प्रारंभिक पड़ताल में लगभग 53 करोड़ रुपये की धनराशि संदिग्ध पाई गई है। जांच के दायरे में आए मामलों में करीब दस प्रतिशत भुगतान पूरी तरह अप्रामाणिक मिला।
प्रशासन द्वारा वर्ष 2013 से 2025 तक के अभिलेखों में से कई मामलों को यादृच्छिक रूप से चुना गया। परीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में प्रविष्टियां नियमों के विपरीत पाई गईं। विवरण के अनुसार लगभग 50 करोड़ रुपये अनुसूचित जाति मद और तीन करोड़ रुपये सामान्य वर्ग छात्रवृत्ति मद में अनियमित तरीके से दर्शाए गए। मामले की गहराई से छानबीन के लिए चार सदस्यीय जांच दल गठित किया गया, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
विश्वविद्यालय पर शिकंजा: छात्रवृत्ति से वंचित, वसूली और FIR की तैयारी
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/grand-cxo-meet-2025-held-at-its-mohan-nagar/
जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने स्पष्ट किया कि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के ठोस संकेत मिलने के बाद विश्वविद्यालय को छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित कर दिया गया है। अब यहां अध्ययनरत कोई भी विद्यार्थी सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले सकेगा। संबंधित धनराशि की वसूली की कार्रवाई के साथ-साथ प्राथमिकी दर्ज कराने का भी निर्णय लिया गया है। आगे की विस्तृत जांच में राशि और बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे प्रकरण से अनभिज्ञता जताते हुए कहा है कि उन्हें इस प्रकार की किसी अनियमितता की जानकारी नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर जांच और कानूनी कार्रवाई की आगे की प्रक्रिया जारी है।
