हापुड़ (शिखर समाचार) गैंगस्टर से जुड़े एक मामले में अदालत ने हापुड़ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक पर पचास हजार रुपए का दंड लगाया है। अपर जिला व सत्र न्यायालय/विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) ने यह आदेश स्पष्टीकरण प्रस्तुत न करने के कारण दिया। साथ ही अदालत ने पांच फरवरी 2026 को डीएम, एसपी और हापुड़ थाना प्रभारी निरीक्षक को सभी संबंधित अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश भी जारी किए हैं।
गैंगस्टर एक्ट मामले में रंजनी की जमानत याचिका, अधिवक्ता ने दर्ज दो अनसुलझे मामलों का हवाला दिया
अदालत के अनुसार यह मामला अपराध संख्या 01/2026 से जुड़ा है, जिसमें अभियुक्ता रंजनी ने धारा 2/3 गैंग्स्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अभियुक्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि गैंगचार्ट में उनके विरुद्ध दो केस (अपराध संख्या 155/2025 और 156/2025) दर्शाए गए हैं, जबकि इन दोनों मामलों में न तो आरोप पत्र दाखिल हुए हैं और न ही कोर्ट ने संज्ञान लिया है। अभियुक्ता पहले से ही थाने से जमानत पर है।
कोर्ट ने अधिवक्ता के तर्क को सही मानते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि गैंगचार्ट में केवल वे मामले शामिल किए जा सकते हैं जिनमें अभियोग पत्र दाखिल होकर कोर्ट द्वारा संज्ञान लिया गया हो।
अदालत ने गैंग चार्ट में गलत जानकारी को बताया गंभीर उल्लंघन, आरोपपत्र न होने के बावजूद दाखिल दिखाए गए मामले
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अदालत ने गैंग चार्ट और संबंधित अभिलेखों की जाँच में पाया कि नौ दिसंबर 2025 को डीएम व एसपी ने गैंगचार्ट को अनुमोदित किया, जिसमें बताया गया कि दोनों मामलों में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हैं। लेकिन कोर्ट के रिकार्ड और प्रमाणित प्रतिलिपियों से स्पष्ट हुआ कि यह तथ्य असत्य है। अदालत ने इसे उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण नियमावली 2021 और उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
विशेष न्यायाधीश ने 30 जनवरी 2026 को कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार पांडेय से स्पष्टीकरण तलब किया था। डीएम और एसपी से भी जिला शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से जवाब मांगा गया। सोमवार की सुनवाई में कोई भी अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
अदालत ने गलत गैंग चार्ट पर 50 हजार रुपए हर्जाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया
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इस पर अदालत ने जिला शासकीय अधिवक्ता के स्थगन प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपए हर्जाना काटकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने सभी पक्षों को चेतावनी दी कि पांच फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे, कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक, एसपी और डीएम सभी अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों।
अभिलेखों के अनुसार यह फैसला अदालत की सख्ती और कानून के प्रति स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि गैंगस्टर एक्ट के तहत गैंगचार्ट में तथ्यात्मक सटीकता अनिवार्य है, और अधिकारियों की लापरवाही को कोई सहन नहीं किया जाएगा।
