जेवर/ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार) अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स में देश का परचम लहराने वाले जेवर क्षेत्र के गोविंदगढ़ गांव निवासी प्रवीण कुमार को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किए जाने की घोषणा होते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह सम्मान मिलने की खबर फैलते ही गांव में ढोल नगाड़ों के साथ जश्न का माहौल बन गया है और प्रवीण के आवास पर बधाई देने वालों का लगातार आना जाना लगा हुआ है।
जिद और मेहनत की मिसाल: प्रवीण कुमार ने सीमित संसाधनों में भी विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया
पैरा ओलंपिक में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर भारत का नाम विश्व पटल पर चमकाने वाले प्रवीण कुमार ने सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौती के बावजूद जिस जिद और मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है, वह आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
परिवार के अनुसार प्रवीण बचपन से ही खेलों के प्रति खास लगाव रखते थे। एक पैर में शारीरिक समस्या होने के बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा। विद्यालयी जीवन के दौरान ही उन्होंने ऊंची कूद में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी थी। गांव में खेल प्रशिक्षण की सुविधाएं न होने के बावजूद उन्होंने अपने अभ्यास में कोई कमी नहीं आने दी और निरंतर मेहनत के बल पर राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
गांव की शान: प्रवीण कुमार की मेहनत और संकल्प से चमका परिवार और समुदाय का गौरव
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प्रवीण के पिता अमरपाल ने बताया कि पद्मश्री की घोषणा के बाद से पूरे गांव में उत्सव जैसा वातावरण है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब बेटे के भविष्य को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन प्रवीण के आत्मविश्वास और संकल्प ने सभी आशंकाओं को पीछे छोड़ दिया। आज वही बेटा देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक पाने जा रहा है, यह पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।
खुद प्रवीण कुमार ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से इस सम्मान की उम्मीद लगाए हुए थे। उन्हें विश्वास था कि उनकी मेहनत और उपलब्धियों को एक दिन देश जरूर पहचानेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उन्हें खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वह राजधानी दिल्ली में रहकर जापान में अक्टूबर माह में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी में जुटे हैं और उनका लक्ष्य वहां भी देश के लिए पदक जीतना है।
प्रवीण कुमार: कठिन परिश्रम और निरंतरता की चमकती उपलब्धियों की कहानी
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उल्लेखनीय है कि प्रवीण कुमार ने वर्ष 2020 में टोक्यो पैरा ओलंपिक खेलों में ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मात्र 18 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल कर वह सबसे कम उम्र में पैरा ओलंपिक पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी बने। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2022 में चीन में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वर्ष 2023 में विश्व पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कांस्य पदक और उसी वर्ष एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी निरंतरता साबित की। वर्ष 2024 में पेरिस पैरा ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा। वहीं वर्ष 2025 में दिल्ली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
पद्मश्री सम्मान की घोषणा के साथ ही प्रवीण कुमार की यह उपलब्धि न केवल जेवर और गोविंदगढ़ गांव, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गई है।
