ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने लंबे समय से लंबित मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए 39 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन को निरस्त कर दिया है। यह निर्णय औद्योगिक विकास को गति देने और निष्क्रिय आवंटनों पर रोक लगाने की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
अंतिम मौका: पट्टा विलेख निष्पादन में विलंब पर आवंटियों के लिए सार्वजनिक सूचना
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह कार्रवाई की गई। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि कुल 366 ऐसे आवंटी थे, जिन्हें पूर्व में सभी औपचारिकताएं पूरी करने हेतु आवश्यक सूची जारी की जा चुकी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्होंने पट्टा विलेख निष्पादित नहीं कराया। ऐसे सभी आवंटियों को अंतिम अवसर प्रदान करते हुए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की गई, जिसमें त्वरित उत्तर के लिए क्यूआर संकेतक भी सम्मिलित किया गया। यह सूचना 24 नवंबर को समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के साथ साथ प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई थी।
प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि वर्ष 2020 से लगातार औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को औपचारिक सूची जारी की जा रही है। नियमों के अनुसार सूची जारी होने के 60 दिनों के भीतर आवंटी को भूखंड का पट्टा विलेख निष्पादित कर कब्जा प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इसके पश्चात मानचित्र स्वीकृत कराकर अधिकतम चार वर्षों के भीतर औद्योगिक इकाई स्थापित कर उत्पादन आरंभ करना आवश्यक है। इन शर्तों का उद्देश्य क्षेत्र में शीघ्र औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
प्राधिकरण की सख्ती: पट्टा विलेख निष्पादन में लापरवाही पर लगातार नोटिस
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औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता देते हुए प्राधिकरण ने उन सभी आवंटियों को, जिन्होंने सूची जारी होने के बाद भी लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की, पुनः स्मरण पत्र भेजे। इसके साथ ही तीन बार नोटिस जारी कर पट्टा विलेख निष्पादन का अनुरोध किया गया। बावजूद इसके कुछ आवंटियों ने न तो विलेख निष्पादन में रुचि दिखाई और न ही नोटिसों का संतोषजनक उत्तर दिया।
इन्हीं कारणों के चलते प्राधिकरण ने सेक्टर 29, 32 और 33 में स्थित 39 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन को समाप्त करने का निर्णय लिया। ये भूखंड पूर्व में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आवंटित किए गए थे, लेकिन निर्धारित शर्तों का पालन न होने के कारण अब इन्हें निरस्त कर दिया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि भविष्य में ऐसे भूखंडों को पुनः आवंटित कर वास्तविक निवेशकों और उद्यमियों को अवसर दिया जाएगा, ताकि क्षेत्र में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।
