बिजनौर (शिखर समाचार) बढ़ापुर वन क्षेत्र की रामजीवाला बीट में मिले बेसहारा हाथी के नर शावक को वन विभाग ने सुरक्षित संरक्षण के उद्देश्य से पीलीभीत बाघ संरक्षण क्षेत्र भेज दिया। भावनात्मक माहौल में वन कर्मियों ने शावक को फूलों की माला पहनाकर विदा किया। यात्रा के दौरान उसकी देखभाल सुनिश्चित करने के लिए पशु चिकित्सक और प्रशिक्षित वन कर्मचारी भी साथ भेजे गए हैं।
मां से बिछड़ा नन्हा जीवन: गड्ढे से उठी करुण पुकार ने बचाई हथिनी के शावक की जान
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग दो सप्ताह पहले रामजीवाला बीट क्षेत्र में एक हथिनी ने नर शावक को जन्म दिया था। जन्म के कुछ समय बाद ही हथिनी शावक को छोड़कर जंगल की ओर चली गई। गश्त के दौरान गड्ढे से आती करुण आवाज सुनकर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे दिन हथिनी के लौटने की प्रतीक्षा की गई, लेकिन हथिनी वापस नहीं आई। इसके बाद शावक को सुरक्षित स्थान पर रखकर उसकी नियमित देखरेख शुरू की गई।
मां से मिलन की उम्मीद टूटी, सुरक्षित भविष्य की राह पर नन्हा हाथी—पीलीभीत भेजा गया शावक
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वन विभाग ने पीलीभीत और मथुरा से विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की मदद से शावक को उसकी मां से मिलाने के लगातार प्रयास किए, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद सफलता नहीं मिल सकी। शावक के भविष्य और बेहतर देखभाल को ध्यान में रखते हुए अंततः उसे पीलीभीत बाघ संरक्षण क्षेत्र भेजने का निर्णय लिया गया। बढ़ापुर वन क्षेत्राधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि हाथी के शावक को विशेष व्यवस्था के तहत वाहन से पीलीभीत भेजा गया है। रास्ते में शावक के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए पशु चिकित्सक दक्ष गंगवार सहित वन कर्मियों की टीम तैनात की गई है। वन विभाग का कहना है कि पीलीभीत बाघ संरक्षण क्षेत्र में शावक को अनुकूल वातावरण, उचित चिकित्सा और संरक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उसका सुरक्षित विकास सुनिश्चित हो सके।
