बिजनौर (शिखर समाचार)। शहर कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए उस महिला को गिरफ्तार किया है, जो खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर बैंक से 35 लाख रुपए का लोन लेने पहुंची थी। महिला के साथ उसका साथी भी मौजूद था। दोनों को रंगे हाथों पकड़कर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह घटना शुक्रवार को सिविल लाइन स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा की है, जहां बैंक कर्मियों की सतर्कता से एक बड़ी ठगी की वारदात टल गई।
फर्जी जज बनी महिला का खुलासा: बैंक में 35 लाख के लोन के लिए किया धोखाधड़ी का प्रयास
जानकारी के अनुसार एक महिला बैंक में पहुंची और खुद को रामपुर जिले में तैनात जज बताने लगी। उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ बैंक कर्मियों को फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज सौंपे तथा 35 लाख रुपए का लोन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। बैंक प्रबंधक ने प्रारंभिक जांच में कागजात सही पाए और प्रक्रिया लगभग पूरी कर दी थी, लेकिन महिला के आचरण और बातचीत के दौरान कुछ विसंगतियां सामने आईं। संदेह होने पर बैंक प्रबंधक ने तत्काल कोतवाली पुलिस और साइबर थाना टीम को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम बैंक पहुंची और मौके से महिला सहित उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तलाशी के दौरान उनके पास से एक कार, तीन मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड और अन्य नकली दस्तावेज बरामद किए। पूछताछ में महिला की पहचान मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल थाना क्षेत्र के गांव दधेरू कला निवासी आयशा परवीन के रूप में हुई, जबकि उसका साथी मंडावर क्षेत्र के गांव किशन बास का रहने वाला अनस निकला।
फर्जी जज बनी महिला का खुलासा: बैंक में 35 लाख के लोन के लिए किया धोखाधड़ी का प्रयास
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पुलिस पूछताछ में आयशा परवीन ने स्वीकार किया कि उसने देहरादून स्थित लिब्रा कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली है। वह लंबे समय से खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर ठगी की साजिशें रचती आ रही थी। इस बार उसका मकसद बैंक से मोटा लोन हासिल कर विलासिता भरा जीवन जीने का था।
अपर पुलिस अधीक्षक नगर कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके पास से मिले सभी फर्जी दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इन लोगों ने अन्य बैंकों या संस्थानों में भी इस तरह की ठगी की कोशिश की थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह शिक्षित ठगों का समूह प्रतीत होता है, जो न्यायिक पहचान का दुरुपयोग कर लोगों और संस्थानों को धोखा देने की रणनीति बना रहा था। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है और इनके नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।

