जंगली हाथियों का कहर : गन्ना, गेहूं और सरसों की फसलें रौंदी, किसान दहशत में

Rashtriya Shikhar
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Wild elephants wreak havoc: Sugarcane, wheat and mustard crops crushed, farmers in panic IMAGE CREDIT TO REPORTER

नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार)
क्षेत्र में जंगली हाथियों के एक बड़े झुंड ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। हाथियों ने खड़ी तैयार गन्ने की फसल के साथ-साथ गेहूं और सरसों की फसलों को पैरों तले रौंदते हुए भारी नुकसान पहुंचाया। करीब सत्तर बीघा कृषि भूमि में बोई गई फसल पूरी तरह नष्ट हो गई, जिससे किसानों में गहरा रोष और भय व्याप्त है।

रातों-रात उजड़ी मेहनत: खेतों पर हाथियों का कहर, किसानों की आजीविका संकट में

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कोतवाली विकासखंड क्षेत्र के ग्राम खत्रीवाला में हाथियों का झुंड अचानक खेतों में घुस आया। राकेश कुमार, सोनू कुमार, अमित कुमार, कुंवर पाल सिंह, बुद्ध सिंह, अशोक कुमार, गंगाराम, मोनू कुमार, खूब सिंह, सुभाष चंद्र सहित अनेक किसानों की लगभग पैंतीस बीघा गन्ने की तैयार फसल तथा गेहूं और सरसों की खेती को हाथियों ने तहस नहस कर दिया। किसानों का कहना है कि इस घटना में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार हाथियों के झुंड में छोटे बड़े मिलाकर करीब डेढ़ दर्जन हाथी शामिल हैं। हाथियों की मौजूदगी की सूचना वन विभाग को दी गई, जिस पर विभागीय दल गांव पहुंचा, लेकिन तभी हाथियों का झुंड सामने आ गया। हालात इतने भयावह हो गए कि हाथियों ने वन विभाग की टीम का पीछा किया और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

वन विभाग की अनदेखी से बढ़ा खतरा: गांव-गांव मंडरा रहा हाथियों का साया

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ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से वन विभाग को सूचित कर जंगली हाथियों को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब विभागीय दल मौके पर आने से भी कतराने लगा है। किसानों का कहना है कि पास के रहमापुर, बेनीपुर, कोपा और दोदराजपुर जैसे गांवों के जंगलों में भी हाथियों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

क्षेत्र के किसानों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते वन विभाग और जिला प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो हाथियों का झुंड शेष बची फसलों को भी नष्ट कर देगा। दर्जन भर से अधिक गांवों के कृषकों ने तहसील प्रशासन से हाथियों द्वारा नष्ट की गई फसलों का उचित मुआवजा दिलाने और स्थायी समाधान की मांग की है। किसानों का कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और शीघ्र मुआवजा ही उन्हें इस संकट से उबार सकता है।

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