वेदांता का डिमर्जर मार्च 2026 तक पूरा होगा, अनिल अग्रवाल बोले, पांच अलग वेदांता आएंगी

Rashtriya Shikhar
4 Min Read
Vedanta's demerger will be completed by March 2026 IMAGE CREDIT TO वेदांता कंपनी प्रोफाइल फोटो

नई दिल्ली (शिखर समाचार/ ऐजेंसी)
तेल, धातु और ऊर्जा क्षेत्रों में विविध कारोबार करने वाला प्रमुख समूह वेदांता लिमिटेड अपने बहुप्रतीक्षित डिमर्जर की प्रक्रिया को अगले साल मार्च 2026 तक पूरा करने की तैयारी में है। इस कदम के तहत समूह को पांच स्वतंत्र, सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित किया जाएगा।

वेदांता का नया दृष्टिकोण: शुद्ध खेल व्यवसाय मॉडल से हर क्षेत्र में विकास की नई ऊँचाइयाँ

ALSO READ:https://www.livehindustan.com/ncr/schools-in-ghaziabad-have-been-permitted-to-conduct-classes-physically-201765984875011.html

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि सभी नई कंपनियां शुद्ध खेल व्यवसाय (Pure-play Business) के रूप में काम करेंगी और हर इकाई का विकास क्षमता के मामले में आज की वेदांता के बराबर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस विभाजन का उद्देश्य यह है कि ज़िंक, एल्युमिनियम, तेल और गैस, बिजली, लौह अयस्क और स्टील जैसे प्रमुख क्षेत्रों की पूरी संभावनाओं का दोहन किया जा सके।

मंगलवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने इस पुनर्गठन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। डिमर्जर के बाद बेस मेटल्स का व्यवसाय मूल वेदांता लिमिटेड में बना रहेगा, जबकि अन्य चार व्यवसाय वेदांता एल्युमिनियम, तालवंडी साबो पावर, वेदांता स्टील और आयरन, तथा माल्को एनर्जी नई सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में स्वतंत्र रूप से संचालित होंगे।

कर्ज और प्रबंधन की संरचना

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/administration-took-strict-action-on-illegal/]

अग्रवाल ने बताया कि डिमर्जर के बाद लगभग 48,000 करोड़ रुपये का कर्ज पांचों कंपनियों में उनके नकदी प्रवाह के आधार पर बांटा जाएगा। सभी नई कंपनियों का अलग बोर्ड, स्वतंत्र सीईओ और पेशेवर प्रबंधन होगा। प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी लगभग 50% बनी रहेगी, लेकिन दैनिक संचालन में शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि हर इकाई की वित्तीय क्षमता के अनुसार कर्ज का बंटवारा होगा। सभी कंपनियों में स्वतंत्र बोर्ड और प्रोत्साहन आधारित प्रबंधन प्रणाली लागू रहेगी। अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सभी पांच कंपनियों के चेयरमैन नहीं होंगे। उदाहरण के तौर पर, हिंदुस्तान ज़िंक की अध्यक्षता उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल कर रही हैं, और पेशेवर नेतृत्व के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

विकास और विस्तार की योजनाएं

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/administration-took-strict-action-on-illegal/

वेदांता ज़िंक और सिल्वर उत्पादन को कई गुना बढ़ाने पर काम कर रही है। भारत में चांदी की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन को वर्तमान 700 टन से बढ़ाकर 3,000 टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है।

एल्युमिनियम कारोबार में क्षमता को वर्तमान 30 लाख टन से दोगुना किया जाएगा, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा और कैप्टिव माइंस के माध्यम से नई परियोजनाओं का विकास किया जाएगा। राजस्थान में एक बड़ा डीएपी उर्वरक संयंत्र भी निर्माणाधीन है। तेल और गैस क्षेत्र में कंपनी अल्पावधि में 3 लाख बैरल प्रतिदिन और अगले 4 से 5 वर्षों में 10 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन लक्ष्य पर काम कर रही है। लौह अयस्क और स्टील व्यवसाय को ‘ग्रीन स्टील’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसकी उत्पादन क्षमता 10 से 15 मिलियन टन रहने की योजना है। पावर सेक्टर में कंपनी 20,000 मेगावॉट तक की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखती है।

डिविडेंड और पूंजी निवेश जारी रहेगा

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/administration-fully-alert-on-electoral/

अग्रवाल ने कहा कि डिमर्जर के बाद भी आक्रामक पूंजी निवेश और नियमित डिविडेंड वितरण नीति जारी रहेगी। उन्होंने हंसते हुए कहा कि कैपेक्स तो व्यवसाय की जान है, और डिविडेंड तो मेरे खून में है यह हमेशा रहेगा।

इस कदम के साथ वेदांता समूह की नई रूपरेखा निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शिता और हर व्यवसाय की विकास क्षमता को स्पष्ट रूप से दिखाएगी।

Share This Article
Leave a comment