सिनेमा की चमक और ब्रांडिंग की ताकत: नई किताब ने खोले फिल्म प्रचार के राज़

Rashtriya Shikhar
3 Min Read
The shine of cinema and the power of branding: The new book revealed the secrets of film promotion IMAGE CREDIT TO राष्ट्रीय पुस्तक न्यास

नई दिल्ली (शिखर समाचार) आज के दौर में फिल्मों का प्रचार केवल कहानी या नायकों तक सीमित नहीं रह गया है। संवाद, गीत और नृत्य की झलकें पहले ही लोगों के बीच पहुंचाकर फिल्म को एक पहचान दी जाती है। इसी बदलते परिदृश्य को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक व्हेन ब्रांडिंग मेट द मूवीज़ का विमोचन नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में किया गया।

‘व्हेन ब्रांडिंग मेट द मूवी’ का विमोचन, फिल्म और विज्ञापन जगत के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

ALSO READ:https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/ghaziabad/ghaziabad-news-elderly-man-body-found-in-brave-hearts-society-flat-for-10-days/articleshow/126487279.cms

व्हेन ब्रांडिंग मेट द मूवी पुस्तक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित की गई है। इसके लेखक चैतन्य कुमार प्रसाद हैं, जबकि युवा सह लेखिकाओं में वैष्णवी श्रीनिवासन और ज़ोया अहमद शामिल हैं। पुस्तक विमोचन के अवसर पर एक विचार विमर्श सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा फिल्म जगत से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, फिल्म निर्माता और विज्ञापन विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे ने की और सभी वक्ताओं को सम्मानित किया।

यह पुस्तक केवल फिल्मों पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उन तमाम प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालती है जो परदे के पीछे और आसपास घटती हैं। लेखक बताते हैं कि कैसे किसी फिल्म के कलाकार, निर्देशक, निर्माण संस्था और प्रचार रणनीतियां मिलकर एक ऐसी पहचान गढ़ती हैं, जो कई बार फिल्म से भी बड़ी हो जाती है।

ब्रांडिंग और सिनेमा का संगम: फिल्मों को यादगार बनाने के राज़ पर चर्चा

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/e-tender-process-intensified-for-operation/

पुस्तक में यह भी समझाने का प्रयास किया गया है कि ब्रांडिंग की अवधारणा कैसे साधारण पहचान से आगे बढ़कर गहरी कहानियों और भावनाओं से जुड़ गई है। इसमें भारतीय और विदेशी सिनेमा, क्षेत्रीय फिल्मों, स्वतंत्र सिनेमा, फिल्म महोत्सवों, पुरस्कारों, फैशन और सामाजिक माध्यमों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई है। लेखक यह प्रश्न उठाते हैं कि आखिर कौन से तत्व किसी फिल्म को सामूहिक स्मृति का हिस्सा बना देते हैं।

कुल मिलाकर यह पुस्तक सिनेमा और ब्रांडिंग के आपसी संबंध को सरल और गहन ढंग से प्रस्तुत करती है, जो विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सिनेमा प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

WhatsApp Image 2025 12 25 at 7.01.06 PM 12
Share This Article
Leave a comment