निपुण भारत मिशन के तहत न्याय पंचायतों में सजी शिक्षा चौपाल, अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर

Rashtriya Shikhar
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Under the Nipun Bharat Mission, Education Chaupals were organized in Nyaya Panchayats, emphasizing active participation of parents. IMAGE CREDIT TO REPORTER

जेवर/ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार) बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने और बच्चों में पठन पाठन व गणना कौशल को अपेक्षित स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से जेवर विकासखंड की विभिन्न न्याय पंचायतों में निपुण भारत मिशन अभियान के अंतर्गत शनिवार को व्यापक स्तर पर शिक्षा चौपालों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड शिक्षा अधिकारी मुहम्मद राशिद ने की। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों को निर्धारित शैक्षिक लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति के साथ साथ समाज और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया।

गांव-गांव में शिक्षा की बात: अभिभावक बने बच्चों की सीखने की ताकत

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अभियान के तहत मोयरा, लोदोना, पारोही, नगला बंजारा, दयानतपुर, रोनीजा और नगला हांडा सहित कई गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा चौपालें आयोजित की गईं। चौपालों के माध्यम से अभिभावकों को निपुण भारत मिशन की अवधारणा, उद्देश्य और बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। शिक्षकों ने सरल भाषा में यह बताया कि किस प्रकार घर पर भी बच्चों की पढ़ाई में सहयोग कर उन्हें सीखने के प्रति प्रेरित किया जा सकता है।

निपुण भारत: जब शिक्षक, अभिभावक और समुदाय बनें बच्चों की सफलता के सच्चे साथी

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नगला बंजारा में आयोजित शिक्षा चौपाल में जिला समन्वयक निपुण कार्यक्रम अमित वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें शिक्षक, अभिभावक और समुदाय तीनों की समान भूमिका है। उन्होंने बच्चों की नियमित उपस्थिति, अभ्यास और सकारात्मक वातावरण को सफलता की कुंजी बताया। कार्यक्रम में अकादमिक रिसोर्स पर्सन हरेंद्र शर्मा, अर्चना शिरोमणि, सारिका गोयल, सतपाल भाटी, दिवान सिंह, ललित गर्ग, पारुल, अभिरुचि शर्मा, अनामिका शर्मा और प्रवीण अत्रि सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी अपने विचार रखे। चौपालों में लगभग एक सौ अभिभावक और बच्चे मौजूद रहे, जिन्होंने संवाद के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए।
शिक्षा चौपालों के आयोजन से गांवों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ती दिखाई दी और अभिभावकों ने बच्चों की प्रगति में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।

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