ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)
यमुना प्राधिकरण का परिसर 79वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देशभक्ति की भावना और उल्लास से सराबोर रहा। समारोह की कमान संभालते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राकेश कुमार सिंह ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और भावुक शब्दों में उन वीर सपूतों को याद किया, जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर देश को आज़ाद कराया। उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता के महत्व, इसकी प्राप्ति में दी गई अनगिनत कुर्बानियों और देश के विकास में प्राधिकरण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने अब तक कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक अमल में लाकर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत किया है। साथ ही आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों की स्थापना और सेमीकंडक्टर यूनिट फोक्सकोन जैसे निवेशों को इस क्षेत्र की प्रगति का अहम आधार बताते हुए भविष्य की विकास योजनाओं का विस्तृत खाका भी प्रस्तुत किया।
स्वतंत्रता संग्राम से आधुनिक भारत तक: शैलेन्द्र भाटिया और अशोक कुमार सिंह ने साझा की प्रेरक यात्रा
विशेष कार्याधिकारी शैलेन्द्र भाटिया ने समारोह में ऐतिहासिक दृष्टि से स्वतंत्रता संग्राम की पूरी यात्रा का वर्णन करते हुए 1757 के प्लासी युद्ध, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक के संघर्षों की गाथा सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में भारत ने स्वास्थ्य, खाद्यान्न, अंतरिक्ष विज्ञान, डिजिटल क्रांति, निष्पक्ष चुनाव, सेना की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों की सफलता जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। महाप्रबंधक वित्त अशोक कुमार सिंह ने मध्यकालीन काल से लेकर आधुनिक भारत तक की ऐतिहासिक और सामाजिक प्रगति पर सारगर्भित विचार रखे, जिससे उपस्थित जनमानस को इतिहास और वर्तमान के बीच का स्पष्ट दृष्टिकोण मिला।
देशभक्ति की रंगीन छटा से सजा समारोह, सम्मान ने बढ़ाया बच्चों और शिक्षकों का उत्साह और आत्मविश्वास
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समारोह में स्कूली बच्चों और शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, नृत्य और नाट्य मंचन ने वातावरण को भावनाओं और उत्साह से भर दिया। अंत में सीईओ राकेश कुमार सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी प्रतिभागी बच्चों और शिक्षकों को सम्मानित किया, जिससे उनका मनोबल और उत्साह दोगुना हो गया। यह आयोजन केवल एक राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और भविष्य की नई संभावनाओं का संगम बना, जिसने सभी को गर्व, प्रेरणा और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया।

