बिजनौर (शिखर समाचार)। जिला बार एसोसिएशन एवं पुस्तकालय के वार्षिक चुनाव में मंगलवार को उस समय भारी हंगामा और अव्यवस्था फैल गई, जब मतदान शुरू होने से पहले ही अधिवक्ताओं के बीच विवाद गहराने लगा और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि पूरी चुनाव प्रक्रिया बाधित हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने हस्तक्षेप करते हुए इस चुनाव को अवैध घोषित कर तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अब नई तिथि की घोषणा बार काउंसिल द्वारा बाद में की जाएगी।
मतदान से पहले ही शुरू हुआ विवाद, प्रक्रिया ठप
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान प्रातः 8 बजे से प्रारंभ होना था और इसके लिए अधिवक्ता सुबह से ही मतदान स्थल पर पहुंचकर कतारों में खड़े हो गए थे। लेकिन मतदान शुरू होने से पहले ही किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हंगामे में बदल गई।
बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को देखते हुए एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष ठाकुर चंद्रवीर सिंह ने चुनाव संपन्न कराने में असमर्थता जताते हुए प्रक्रिया को स्थगित करने की घोषणा कर दी और स्थल से चले गए।
देरी से शुरू हुआ मतदान, पूरे समय बना रहा तनाव
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एल्डर्स कमेटी के हटने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और अधिवक्ताओं के बीच नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। इसी बीच कुछ अधिवक्ताओं के दबाव में वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह टिकैत ने मोर्चा संभालते हुए लगभग चार घंटे की देरी से मतदान प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ कराया।
हालांकि यह प्रक्रिया भी विवादों के साये में रही और पूरे समय वातावरण तनावपूर्ण बना रहा। शाम करीब 5 बजे तक मतदान चलता रहा, लेकिन इस दौरान भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी।
बार काउंसिल ने चुनाव किया निरस्त, नई तारीख का इंतजार
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घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह गहलोत ने पूरे मामले से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष शिव कुमार गौड़ को अवगत कराया। बार काउंसिल ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि हंगामे और बिना अधिकृत अनुमति के कराई गई चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह अनुचित और अवैध है, इसलिए इसे किसी भी स्थिति में मान्यता नहीं दी जा सकती। बार काउंसिल ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में बार एसोसिएशन के चुनाव निर्धारित दिशा-निर्देशों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही कराए जाएं। साथ ही आगामी चुनाव में कड़ी निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के संकेत भी दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि बार अध्यक्ष पद के लिए चौधरी राजेंद्र सिंह और शेर सिंह के बीच सीधा मुकाबला था। चुनाव के दौरान प्रत्याशी शेर सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर फर्जी मतपत्रों के माध्यम से धांधली करने का आरोप लगाया और निष्पक्ष चुनाव के लिए न्यायिक या प्रशासनिक निगरानी की मांग की। पूरे घटनाक्रम ने बार एसोसिएशन की चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें बार काउंसिल के अगले निर्णय और नई चुनाव तिथि पर टिकी हुई हैं।
