नगीना/बिजनौर (शिखर समाचार) बुधवार को क्षेत्र में पड़ी भीषण ठंड ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। सुबह से ही हाड़ कंपा देने वाली सर्दी और बर्फीली हवाओं के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। पूरे दिन ठंड का प्रकोप ऐसा रहा कि दोपहर बाद सूर्य निकलने के बावजूद ठिठुरन में कोई खास कमी नहीं आई। ठंडी हवाओं ने धूप को भी बेअसर कर दिया, जिससे गलियों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
कड़ाके की ठंड ने थामी रफ्तार: जनवरी के सबसे सर्द दिन बाजारों में पसरा सन्नाटा
जनवरी माह के अब तक के सबसे ठंडे दिन के रूप में दर्ज इस बुधवार को बाजारों की रौनक पूरी तरह गायब नजर आई। आमतौर पर चहल पहल से गुलजार रहने वाले मुख्य बाजारों में दुकानें तो खुलीं, लेकिन ग्राहकों की आमद न के बराबर रही। व्यापारी ठंड के कारण दिनभर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे और खरीद फरोख्त ठप होने से निराश दिखे। सड़कों पर आवाजाही कम होने से राष्ट्रीय मार्ग पर भी वाहनों की संख्या घटती नजर आई।
भीषण सर्दी का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों पर देखने को मिला। नगीना में मजदूरों के एकत्र होने वाले स्थानों पर सुबह से ही लोग रोजगार की तलाश में पहुंचे, लेकिन ठंड और सुस्ती के कारण काम देने वाले कम ही दिखाई दिए। मजदूर सुबह दस से ग्यारह बजे तक उम्मीद लगाए खड़े रहे और जब कोई काम नहीं मिला तो मायूस होकर घर लौट गए। रोजगार न मिलने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट और गहराता जा रहा है।
अलाव बना सहारा: बढ़ती ठंड ने लोगों को घरों में कैद होने पर किया मजबूर
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ठंड से राहत पाने के लिए लोग अपने घरों में अलाव जलाकर बैठे रहे, वहीं दुकानदारों ने भी अपने प्रतिष्ठानों के सामने आग का सहारा लिया। जगह जगह जलते अलाव सर्दी की मार झेलते लोगों की मजबूरी बयां कर रहे थे। शाम होते-होते ठंड और तेज हो गई, जिससे लोग आवश्यक काम होने पर ही घरों से बाहर निकले।
लगातार बढ़ती ठंड के कारण आम जनजीवन पूरी तरह सुस्त पड़ गया है। मौसम के इस कड़े मिजाज ने न केवल बाजारों और यातायात को प्रभावित किया, बल्कि मजदूर वर्ग और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। यदि ठंड का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
