पटना (शिखर समाचार) दर्शन परिषद्, बिहार के तत्वावधान में 22वीं प्रो. (डॉ.) विजयश्री स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन 16 फरवरी 2026 सोमवार को अपराह्न ढाई बजे से बी. डी. कॉलेज, मीठापुर, पटना परिसर में किया जाएगा। परिषद के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि यह व्याख्यानमाला प्रति वर्ष शिक्षाविदों और चिंतकों के बीच वैचारिक संवाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि डॉ. विजयश्री पटना विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की प्रतिष्ठित प्राध्यापिका रहीं और उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी स्मृति को समर्पित यह वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला उनके पति एवं भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेशचन्द्र सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित होती रही है। इस मंच के माध्यम से देश के विभिन्न विद्वान समसामयिक और दार्शनिक विषयों पर अपने विचार रखते हैं।
‘भारत की अवधारणा’ पर व्याख्यानमाला: शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के बीच विचार-विमर्श का प्रमुख मंच
इस वर्ष व्याख्यानमाला का मुख्य विषय भारत की अवधारणा निर्धारित किया गया है, जिसमें राष्ट्र, संस्कृति, परंपरा और वैचारिक आधार पर विस्तृत विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रज्ञा केन्द्र के राष्ट्रीय समन्वयक रामाशीष सिंह होंगे, जो विषय के विभिन्न आयामों पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।
कार्यक्रम का उद्घाटन पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति प्रो. उपेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा किया जाएगा। मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार उपस्थित रहेंगे। साथ ही रामकृष्ण मिशन आश्रम, मुजफ्फरपुर के सचिव स्वामी भावात्मानंद आशीर्वचन प्रदान करेंगे।
व्याख्यानमाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में बीएनएमयू, मधेपुरा के पूर्व कुलपति प्रो. आर. पी. श्रीवास्तव तथा मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति प्रो. एस. पी. शाही की उपस्थिति प्रस्तावित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत विकास विकलांग न्यास के संस्थापक महासचिव पद्मश्री बिमल कुमार जैन करेंगे और वे विषय प्रवेश भी कराएंगे।
आयोजन में अतिथियों के स्वागत की जिम्मेदारी बी. डी. कॉलेज, पटना की प्रधानाचार्या प्रो. रत्ना अमृत तथा दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर कुमार पाण्डेय निभाएंगे। आयोजकों के अनुसार व्याख्यानमाला में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और बौद्धिक जगत से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी की अपेक्षा है। कार्यक्रम को विचार विमर्श और शैक्षणिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
