सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल : गाजियाबाद में इफ्तार के मंच से गूंजा अमन और भाईचारे का पैग़ाम

Rashtriya Shikhar
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A Symbol of Communal Harmony: A Message of Peace and Brotherhood Echoed from the Iftar Stage in Ghaziabad IMAGE CREDIT TO हाजी शकील सैफी

—पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने भरी हुंकार आओ मिलकर रचें नया इतिहास, साथ मनाएं होली और ईद

आरव शर्मा
गाजियाबाद (शिखर समाचार)।
रमज़ान के मुकद्दस महीने में जहाँ इबादत का दौर जारी है, वहीं गाजियाबाद की सरज़मीं पर मोहब्बत और आपसी एकता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर उभरकर सामने आई। वर्ल्ड पीस हार्मनी के अध्यक्ष हाजी शकील सैफी द्वारा आयोजित भव्य रोज़ा इफ्तार पार्टी में सियासी सरगर्मियों के बीच मानवीय रिश्तों और सामाजिक सौहार्द की अनूठी झलक देखने को मिली। इस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने समाज को जोड़ने और नफरतों को मिटाने का बड़ा संदेश दिया।

प्रमुख हस्तियों का रहा जमावड़ा

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इफ्तार पार्टी में केवल धार्मिक रंग ही नहीं, बल्कि विभिन्न विचारधाराओं का संगम भी दिखा। इस अवसर पर पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन, संभल के सांसद वर्क साहब, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जितेंद्र गौड़, दैनिक तरुणमित्र के ब्यूरो चीफ लायक हुसैन, वरिष्ठ पत्रकार सुदामा पाल और सुनील यादव जैसे दिग्गजों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इनके अलावा जंबल फ्रेम स्टूडियो के चेयरमैन अशरफ हुसैन, असद हुसैन, विशाल भट्ट और कांग्रेस नेता अमित गोयल सहित हजारों की संख्या में रोज़ेदार शरीक हुए।

इंसानियत और सब्र का महीना : हाजी शकील सैफी

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कार्यक्रम के मेज़बान और सैफी मल्टी हॉस्पिटल के चेयरमैन हाजी फैज सैफी ने आए हुए तमाम अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। वहीं, हाजी शकील सैफी ने अपनी दुआओं में देश की खुशहाली और अमन-चैन की कामना की। उन्होंने कहा कि रमज़ान हमें इंसानियत, सब्र और मोहब्बत का पैग़ाम देता है। अल्लाह तमाम आवाम को नेक तौफीक दे ताकि समाज में भाईचारे की जड़ें और मज़बूत हों। हमारा लक्ष्य केवल एक आयोजन करना नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ना है।

धीरेंद्र प्रताप की भावुक अपील

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उत्तराखंड के कद्दावर नेता धीरेंद्र प्रताप ने अपने संबोधन में हाजी शकील सैफी के सामाजिक प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि शकील सैफी रिश्तों की अहमियत को बखूबी समझते हैं और ऐसे आयोजन समाज की नई पीढ़ी को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करते हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक बेहद प्रभावशाली अपील करते हुए कहा कि आओ मिलकर साथ चलें और एक नया इतिहास रचें। हम ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ मिलजुल कर ईद मनाई जाए और मिलकर होली के रंग उड़ाए जाएं। ये अटूट रिश्ते यूँ ही कायम रहने चाहिए।

सांझी संस्कृति की जीवंत मिसाल

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यह रोज़ा इफ्तार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर नहीं रहा, बल्कि यह गंगा जमुनी तहजीब की एक मिसाल साबित हुआ। यहाँ हर वर्ग, धर्म और राजनीतिक विचारधारा के लोग एक ही दस्तरख्वान पर बैठे नज़र आए, जो यह बताने के लिए काफी था कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता ही है।

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