पॉक्सो पर सख्ती और संवेदनशीलता का संगम: डीएलएसए की कन्वर्जेंस कार्यशाला सफल

Rashtriya Shikhar
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A blend of strictness and sensitivity on POCSO Act: the convergence workshop organized by the District Legal Services Authority was successful. IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

आरव शर्मा
गाज़ियाबाद (शिखर समाचार)।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के तत्वावधान में जिला स्तर पर सपोर्ट पर्सन एवं विभिन्न विभागों के हितधारकों की एकदिवसीय अभिसरण प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएलएसए सचिव संजय सिंह ने की, जबकि प्रशिक्षण सत्र का संचालन लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिंह ने किया।

पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता पर जोर

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इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर साझा समझ विकसित करना, सपोर्ट पर्सन की भूमिका को मजबूत करना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक है।

प्रशिक्षण सत्र में लीगल डिफेंस काउंसिल कमल किशोर उपाध्याय, लीगल ऑफिसर लोकेन्द्र सिंह और सपोर्ट पर्सन व पैनल अधिवक्ता चंचल गुप्ता ने महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों ने पॉक्सो मामलों की प्रक्रिया, केस मैनेजमेंट, चाइल्ड फ्रेंडली अप्रोच, विभागीय जिम्मेदारियों की स्पष्टता और समन्वय की जरूरत पर विस्तार से जानकारी दी।

विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी

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कार्यक्रम में डीसीपीयू, सीडब्ल्यूसी, जिला बाल संरक्षण इकाई, लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी), पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग, वन-स्टॉप सेंटर, हेल्पलाइन और सपोर्ट पर्सन सहित सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और कार्य में आने वाली चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की।

कार्यक्रम का समापन प्रभावी मार्गदर्शन के साथ सफलतापूर्वक हुआ, जहां सभी प्रतिभागियों को बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील, समन्वित और जिम्मेदार कार्यप्रणाली अपनाने का संदेश दिया गया।

डीएलएसए सचिव संजय सिंह बोले

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“पॉक्सो मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और समन्वित दृष्टिकोण भी बेहद जरूरी है। सपोर्ट पर्सन की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में बेहद अहम है, जो पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने में सेतु का कार्य करते हैं।

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि हर मामले में बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।”

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