गाजियाबाद (शिखर समाचार) उदयांचल यदुवंश कल्याण समिति गाजियाबाद द्वारा इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किसान टिम्बर स्वरूप पार्क के विशाल प्रांगण में उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। चारों ओर झिलमिलाते झालरों, फूलों की सजीव सजावट और भक्तिमय गीतों ने पूरे परिसर को मानो वृंदावन का रूप प्रदान कर दिया। समिति के संस्थापक संरक्षक व सलाहकार एस एस प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था पिछले आठ वर्षों से लगातार इस आयोजन के माध्यम से समाज को सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
बाल रचनात्मकता की चमक — श्रीकृष्ण लीला से सजी झांकियों ने मोहा मन, नन्हे कलाकारों को मिला सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं, जिनमें श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, उनकी बाल लीलाएं और संदेशों को गीत-संगीत, नृत्य और अभिनय के माध्यम से जीवंत किया गया। नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से हौसला अफजाई की। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए समिति की ओर से पुरस्कृत भी किया गया।
महोत्सव में वरिष्ठ समाजवादी नेता रामदुलार यादव, प्रख्यात गायिका भानुश्री यादव, जितेंद्र यादव, किशनपाल यादव समेत कई अतिथियों ने अपने विचार रखते हुए श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। मंच संचालन कृष्णानंद यादव, भानु प्रकाश यादव और विनोद यादव द्वारा संयमित और प्रभावशाली ढंग से किया गया।
गौरवमयी उपस्थिति से सजा आयोजन — समिति पदाधिकारियों और महिलाओं की सहभागिता ने बढ़ाई शोभा
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/the-leadership-of-ceo-rakesh-kumar-singh/
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष श्रीनिवास यादव, विश्वनाथ यादव, अजित यादव, डॉ. रमोद यादव, डॉ. के पी यादव, आर एन यादव, ठाकुर प्रसाद यादव, दीनानाथ यादव, धर्मेंद्र यादव, रामप्रवेश यादव, जीतन यादव, रंग लाल यादव, दीनानाथ राय, शैलेन्द्र राय, देवमन यादव और कृष्णा यादव सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन मौजूद रहे। महिला वर्ग से फूलमति यादव, उषा प्रसाद, पूनम यादव, दुर्गा यादव, बलकेशा यादव आदि ने भी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित भंडारे में उपस्थित भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त की। समूचा आयोजन इस बात का साक्षी बना कि जब समाज, संस्कृति और श्रद्धा एक मंच पर मिलते हैं तो भक्ति पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि सामूहिक सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक बन जाता है।

