श्रीमद्भागवत कथा का सातवां दिन : सुदामा चरित्र और श्रीकृष्ण की लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु

Rashtriya Shikhar
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Seventh day of Shrimad Bhagwat Katha: Devotees were enthralled by the Sudama character and the pastimes of Shri Krishna IMAGE CREDIT TO REPORTER

हापुड़ (शिखर समाचार) नगर के जवाहरगंज क्षेत्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान सुदामा चरित्र, श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत विराम तथा भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 विवाहों का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

श्रीमद्भागवत कथा: जहाँ शब्दों में साक्षात श्रीकृष्ण का दिव्य दर्शन होता है

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कथावाचक डॉ. शैल बिहारी दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत और भगवान श्रीकृष्ण एक दूसरे से अभिन्न हैं। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शन के समान है। उन्होंने बताया कि जो भी भक्त जिस भाव से भगवान को स्मरण करता है, भगवान उसी रूप में उसे अपना सान्निध्य प्रदान करते हैं।

सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए, लेकिन स्वाभिमान को सदैव बनाए रखना चाहिए। सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार सुदामा द्वारा अर्पित एक मुट्ठी चावल के बदले भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें तीनों लोकों के वैभव से संपन्न कर दिया।

श्रीकृष्ण का दिव्य गृहस्थ लीला प्रसंग: 16,108 विवाहों में छिपा करुणा और धर्म का विस्तार

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कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 विवाहों और वंश वृद्धि का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया। डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पत्नियाँ रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा पटरानियों के रूप में जानी जाती हैं।

उन्होंने पुराणों का उल्लेख करते हुए बताया कि दानव भूमासुर ने 16 हजार कन्याओं की बलि देने का संकल्प लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध कर इन कन्याओं को कारावास से मुक्त कराया। समाज में सम्मान की रक्षा हेतु इन कन्याओं ने श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार किया, जिससे भगवान की 16,108 रानियाँ हुईं।

चंचल संसार का शाश्वत सत्य: लक्ष्मी का सदुपयोग ही जीवन की सच्ची साधना

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कथावाचक ने कहा कि संसार की प्रत्येक वस्तु चंचल है चाहे वह धन हो, संपत्ति हो या वैभव। लक्ष्मी का संग्रह करने के बजाय उसका उपयोग लोककल्याण, दान और पुण्य कार्यों में करना चाहिए, क्योंकि यही जीवन का श्रेष्ठ मार्ग है।

इस अवसर पर सुदामा चरित्र की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें आनंद गर्ग, विशाल अग्रवाल, मनोज कर्णवाल, विकास गोयल, डॉ. सुमन अग्रवाल, यथार्थ अग्रवाल, भावना अग्रवाल, चंद्रप्रकाश ठठेरे, शान्तुन सिंघल, राहुल सिंघल, संजीव रस्तोगी, आयुष बिट्टू वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।

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