ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय सफाई आयोग के सचिव राहुल कश्यप सोमवार को गौतम बुद्ध नगर पहुंचे और सफाई कर्मियों की सुरक्षा, पुनर्वास एवं सामाजिक गरिमा से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। सचिव ने सबसे पहले नोएडा के सेक्टर-115 स्थित सीवेज पंप स्टेशन का निरीक्षण किया, जहाँ 18 अगस्त 2025 को सफाई कार्य के दौरान दम घुटने से विकास और खुशहाल की मृत्यु हो गई थी। इस मौके पर उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मृतक कर्मियों के परिजनों को एम.एस. एक्ट-2013 के प्रावधानों के अंतर्गत आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद सचिव ने सेक्टर-26 स्थित उस स्थल का भी दौरा किया, जहाँ नानू मंडल और कोंकुण मंडल की जान सीवर सफाई के दौरान चली गई थी। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों को भी शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए।
सचिव का संदेश: हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध केवल कानून नहीं, बल्कि सफाई कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा की प्रतिबद्धता
निरीक्षण के उपरांत सचिव ने विकास भवन में संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने हाथ से मैला ढोने का कार्य (प्रतिषेध) एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 की प्रमुख धाराओं पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल निषेध का प्रावधान नहीं, बल्कि सफाई कर्मियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन प्रदान करने की दिशा में सरकार की गंभीर पहल है।
सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि जनपद में कार्यरत सभी सफाई एजेंसियाँ और ठेका कंपनियाँ अपने प्रत्येक कर्मी का पूर्ण विवरण परिवार, उत्तराधिकारी, बीमा, पीएफ और ईएसआई संबंधी जानकारी संबंधित विभागों को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसी भी सफाईकर्मी को जीवन-जोखिम वाले कार्य के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और प्रत्येक को नियमित रूप से व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE किट) मुहैया कराए जाएं।
सफाई कर्मियों का सुरक्षा और स्वास्थ्य सशक्तिकरण: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और प्रशिक्षण अनिवार्य
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उन्होंने बताया कि सफाई से जुड़ी आधुनिक मशीनों और सुरक्षा उपकरणों की खरीद भारत सरकार की नमस्ते स्कीम के तहत की जा सकती है, जिससे कार्य अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सके। उन्होंने नगर निगम, प्राधिकरण और नगर पंचायतों को निर्देश दिया कि सीवर एवं नालों की सफाई अब पूर्णतः यांत्रिक माध्यमों से की जाए और किसी भी स्थिति में मैन्युअल सफाई न कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों की सुविधा के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए, ताकि सफाई संबंधी किसी भी आवश्यकता पर आम लोग सीधे विभाग से संपर्क कर सकें।
बैठक में सचिव ने यह भी कहा कि जिन सफाई कर्मियों की कार्य के दौरान मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष, स्पॉन्सर योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य राहत योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर लंबित मामलों की रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजने के निर्देश दिए।
सफाई कर्मियों का सुरक्षा और स्वास्थ्य सशक्तिकरण: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और प्रशिक्षण अनिवार्य
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उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएं और गंभीर बीमारियों के मामलों में इलाज की व्यवस्था की जाए। साथ ही, कर्मियों को आधुनिक उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, गैस जांच प्रक्रिया और प्राथमिक उपचार की जानकारी देने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं।
बैठक में जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि सचिव द्वारा दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और संबंधित विभागों के माध्यम से हर स्तर पर प्रभावी निगरानी रखी जाएगी। बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा प्राधिकरण सतीश पाल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. शिवाकांत द्विवेदी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सतीश कुमार, एसीपी क्राइम उमेश यादव, डिप्टी सीएमओ डॉ. टीकम सिंह, उप श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी सहित नगर पालिका, नगर पंचायत और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
