गाजियाबाद (शिखर समाचार)। वैशाली में स्तिथ पर्ल कोर्ट सोसायटी में आरडब्लूए बोर्ड ने मेंटेनेंस राशि को बढ़ाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यालय तक पहुंच चुका है, जहाँ सोसाइटी के कई रेजिडेंट्स में मौजूदा बोर्ड के मनमानी पूर्ण रवैये के ख़िलाफ़ अपनी लिखित शिकायत दी है और बोर्ड के इस फ़ैसले पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है। सोसायटी के अधिकतर रेजिडेंट्स का आरोप है कि जिस प्रक्रिया के तहत मेंटनेंस बढ़ाने का फैसला लिया गया या उसे लागू करने की कोशिश की जा रही है, उसमें आम राय या आम सहमति का अभाव है। 25 नवंबर 2025 को बोर्ड सचिव द्वारा सूचना दी गई कि 30 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण जीबीएम होगी। यानी महज पांच दिन पहले रेजिडेंट्स को सूचना दी गई। जीबीएम के एजेंडे में प्वाइंट नंबर 3 में केवल आय व्यय की समीक्षा का उल्लेख था। कहीं भी मेंटनेंस शुल्क बढ़ाने का कोई प्रस्ताव या संकेत शामिल नहीं था। 560 फ्लैट्स वाली सोसायटी में 420 से 425 अधिक वैध वोटर हैं लेकिन 30 नवंबर की जीबीएम में केवल 60 से 65 लोग ही उपस्थित थे। नियमानुसार आवश्यक कोरम के अभाव में कोई महत्वपूर्ण फैसला नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद जीबीएम के अगले ही दिन अखबार के माध्यम से रेजिडेंट्स को यह जानकारी मिली कि बोर्ड ने मेंटनेंस बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस नियम विरुद्ध फैसले के खिलाफ सोसायटी के 70 से अधिक रेजिडेंट्स ने 20 दिसंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार को लिखित शिकायत भेजकर इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की, जो फिलहाल विचाराधीन है।
सोसायटी में विवादित मेंटेनेंस बढ़ोतरी: सर्वे और कोरम के नियमों की अनदेखी पर रेजिडेंट्स का विरोध
इसके बाद बोर्ड के कुछ पदाधिकारियों ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में घर घर सर्वे कराने का दावा किया। सोसायटी के निवासियों ने आरोप लगाया कि सभी रेजिडेंट्स को सर्वे फार्म नहीं दिए गए है। 420-425 वैध वोटर्स में से केवल 315 प्रतिक्रियाएं मिलने का दावा किया गया, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है। 30 दिसंबर 2025 को अचानक सूचना दी गई कि 4 जनवरी 2026 को एक स्पेशल जीबीएम होगी। मात्र चार दिनों की सूचना पर बुलाई गई इस बैठक में भी केवल 70–80 लोग ही मौजूद थे, जो फिर से आवश्यक कोरम से कम थे।इसके बावजूद, महज पांच मिनट के भीतर बहुमत का हवाला देकर मेंटनेंस बढ़ाने की घोषणा कर दी गई। बैठक के दौरान सवाल पूछने वाले रेजिडेंट्स को रोका गया, डेटा सार्वजनिक करने की मांग को गोपनीयता का हवाला देकर खारिज कर दिया गया रेजिडेंट्स के एक समूह द्वारा कराए गए दो स्वतंत्र ऑनलाइन सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने मेंटनेंस बढ़ाने का विरोध किया गया।
