बिजनौर (शिखर समाचार) नगर पालिका परिषद बिजनौर ने कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में स्थायी सुधार लाने के उद्देश्य से नवंबर माह में विशेष पोषण आहार किट वितरित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सोमवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में आयोजित पोषण समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता चेयरमैन इंदिरा सिंह ने की और संचालन अधिशासी अधिकारी विकास कुमार ने किया। बैठक में नगर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषित बच्चों की स्थिति की समीक्षा की गई।
पोषण अभियान की सफलता: 852 में से 637 बच्चे कुपोषण से बाहर, अब बाकी के लिए विशेष आहार किट
समीक्षा के दौरान पाया गया कि जून से अक्टूबर माह के बीच नगर क्षेत्र में संचालित 41 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार प्राप्त करने वाले बच्चों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, नगर क्षेत्र के 852 कुपोषित बच्चों में से 637 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं, जबकि शेष 215 बच्चों को कुपोषण से पोषण की स्थिति में लाने के लिए नवंबर माह में विशेष पोषण आहार किट वितरित की जाएगी। इनमें 35 सैम (गंभीर कुपोषित) और 180 मैम (मध्यम कुपोषित) बच्चे शामिल हैं।
चेयरमैन इंदिरा सिंह ने कहा कि यह सुधार नगर पालिका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए अभी और भी सघन प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि कोई भी बच्चा कुपोषण की श्रेणी में न रहे।
साझी जिम्मेदारी की मिसाल: बैठक में अधिकारियों से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक सक्रिय भागीदारी
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बैठक में सफाई एवं खाद्य निरीक्षक गोविंद चौधरी, अवर अभियंता जलकल गौरव शर्मा, एसबीएम लिपिक संदीप कुमार, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर भावना भारद्वाज सहित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों बबीता शर्मा, संतोष देवी, शिक्षा कुमारी, लक्ष्मी देवी, सीमा शर्मा, सुषमा, संजय, शबाना, निहाल फातिमा, सुमन देवी, शबाना सिद्दीकी, जीनत परवीन, शाहजहां, रिचा सैनी, आमना तथा पालिका के सफाई नायक और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
पोषण समिति ने आगामी महीनों में बच्चों के स्वास्थ्य पर नियमित निगरानी रखने, आहार की गुणवत्ता बढ़ाने और अभिभावकों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने का भी निर्णय लिया। नगर पालिका परिषद का यह प्रयास न केवल कुपोषण को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की मिसाल भी है।

