नई दिल्ली (शिखर समाचार)। नरेला क्षेत्र में नारायणी सेना के पदाधिकारियों ने परम पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भेंट कर गौ रक्षा, धर्म जागरण और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की।
धर्म और गौ संरक्षण पर जोर
इस दौरान संगठन से जुड़े आचार्य रामानुज ने कहा कि वर्तमान समय परिवर्तन का दौर है और इसे धर्म के लिए निर्णायक काल के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युग की क्रांति का शंखनाद हो चुका है और यह एक ऐसे संघर्ष की शुरुआत है, जो आने वाले समय में और व्यापक रूप लेगा। आचार्य रामानुज ने यह भी कहा कि पृथ्वी स्वरूपा गौमाता मानव सभ्यता की रक्षा के लिए जीवनदायिनी कवच बनेंगी और समाज को गौ संरक्षण के प्रति जागरूक होकर इसे जनआंदोलन का रूप देना होगा।
वर्तमान चुनौतियाँ और न्याय की आवश्यकता
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आचार्य रामानुज ने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायियों को वर्तमान परिस्थितियों में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मथुरा-वृंदावन में गौ रक्षक फरसा बाबा की मृत्यु का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे संदिग्ध बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि गौ तस्करी के खिलाफ कार्य करने वाले लोगों को भी कई बार प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
समाजिक जागरूकता और समापन
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कार्यक्रम के दौरान उन्होंने धर्म की स्थापना और समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए संगठित प्रयास करने का आह्वान किया। गौ रक्षा राष्ट्र रक्षा अभियान को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक बताया। इस अवसर पर दिल्ली प्रभारी अधिवक्ता भीम सिंह दुग्गल और युवा शक्ति प्रमुख ठाकुर आदित्य वत्स भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ और ‘नमो नारायण’ के उद्घोष के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने धर्म और गौ संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
