घर के बाहर साइकिल चलाते मासूम पर बंदरों का हमला, शहर में बढ़ते आतंक से दहशत

Rashtriya Shikhar
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Monkeys attack an innocent child riding a bicycle outside his home, terror grips the city IMAGE CREDIT TO REPORTER

हापुड़ (शिखर समाचार) नगर पालिका परिषद की उदासीन कार्यप्रणाली के कारण हापुड़ नगर में बंदरों और आवारा कुत्तों का भय लगातार बढ़ता जा रहा है। गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों में झुंड बनाकर घूम रहे बंदर अब आमजन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। ताजा घटना शहर की एक पॉश कॉलोनी की है, जहां घर के बाहर साइकिल चला रहे एक नन्हे बच्चे पर अचानक बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया।

श्रीनगर कॉलोनी में बंदरों का हमला: बच्चे को पड़ोसियों ने बचाया, इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया

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जानकारी के अनुसार श्रीनगर कॉलोनी निवासी पत्रकार सौरभ शर्मा का पुत्र नव्यांश शर्मा अपने घर के गेट के सामने साइकिल चला रहा था। उसी दौरान आसपास मौजूद बंदरों के झुंड ने अचानक उस पर धावा बोल दिया। हमले से घबराया बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीख-पुकार सुनकर राहगीर और पड़ोसी मौके पर पहुंचे और किसी तरह बंदरों को खदेड़कर बच्चे को उनके चंगुल से मुक्त कराया। इसके बाद परिजन बच्चे को उपचार के लिए चिकित्सक के पास ले गए।

शहर में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब किसी न किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना न मिलती हो। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका और जिला प्रशासन को लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नतीजतन लोगों में रोष और भय दोनों बढ़ता जा रहा है।

हापुड़ में बंदरों का आतंक: बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं, घरों तक सिमट गई जिंदगी

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हापुड़ के आर्य नगर, राधापुरी, श्रीनगर, जवाहरगंज, सरस्वती एन्क्लेव, शिवपुरी, मोदीनगर मार्ग, मेरठ मार्ग और बुलंदशहर मार्ग सहित अनेक इलाकों में बंदरों की भरमार है। हालात ऐसे हैं कि माता पिता बच्चों को घर से बाहर खेलने भेजने से भी कतराने लगे हैं, वहीं बुजुर्गों को सुबह-शाम टहलना भी मुश्किल हो गया है।

बंदरों और आवारा कुत्तों के हमलों का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन दिनों इन जानवरों का स्वभाव अधिक उग्र हो जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन लगभग दो सौ से ढाई सौ लोग रेबीज से बचाव का टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। बीते पंद्रह दिनों में ही दो हजार से अधिक लोग अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते या बंदर के काटने पर रेबीज होने की आशंका काफी बढ़ जाती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में काटे जाने की स्थिति में तुरंत घाव को साफ पानी से धोकर बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद आवश्यक है। नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों और आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि आमजन को इस भय से राहत मिल सके।

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