अलीगढ़ (शिखर समाचार) औद्योगिक कार्यस्थलों पर सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में अलीगढ़ की Mascot Metal Manufacturers कंपनी ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 111-A के अनुपालन में यहां कर्मचारियों को फर्स्ट ऐड एवं हेल्थ एंड सेफ्टी की विशेष ट्रेनिंग कराई गई। इस प्रशिक्षण का संचालन एसएमई गुरुकुल फाउंडेशन की ओर से डॉ. अभिषेक कंचन ने किया।
कर्मचारियों को कार्यस्थल सुरक्षा और प्राथमिक उपचार में प्रशिक्षण अनिवार्य
कार्यक्रम में कंपनी के कर्मचारियों को कार्यस्थल पर संभावित खतरों, दुर्घटनाओं की रोकथाम और प्राथमिक उपचार की विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. कंचन ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि साधारण लापरवाही कभी-कभी बड़ी दुर्घटना का रूप ले सकती है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे सुरक्षा मानकों को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि अपने जीवन और सहकर्मियों की सुरक्षा के लिए इन्हें प्राथमिकता दें।
धारा 111-A के तहत स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य, कर्मचारियों ने प्रशिक्षण को बताया लाभकारी
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कारखाना अधिनियम की धारा 111-A साफ तौर पर नियोक्ताओं को यह जिम्मेदारी सौंपती है कि वे अपने कारखानों में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण दिलवाएं। इसके लिए उन्हीं संस्थानों से सहयोग लिया जा सकता है, जिन्हें मुख्य निरीक्षक कारखाना की स्वीकृति प्राप्त हो। अधिनियम यह भी निर्धारित करता है कि इस प्रकार की ट्रेनिंग का वार्षिक विवरण संबंधित फैक्ट्री विभाग को सौंपना अनिवार्य है अन्यथा कंपनी पर दंडात्मक कार्यवाही हो सकती है।
सुरक्षा प्रशिक्षण से कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित, औद्योगिक दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद
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कंपनी प्रबंधन ने इस अवसर पर कहा कि सुरक्षा और स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर कोई भी उद्योग लंबी दूरी तय नहीं कर सकता। श्रमिकों का सुरक्षित रहना ही उत्पादन की निरंतरता और गुणवत्ता की गारंटी हैह कर्मचारियों ने भी इस प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने कामकाज के दौरान सावधानियां बरतने और आपातकालीन हालात से निपटने के तरीके सीखने को मिले। औद्योगिक क्षेत्र में यह पहल न केवल कानूनी अनुपालन का हिस्सा है बल्कि श्रमिकों के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में भी ठोस कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी ट्रेनिंग नियमित अंतराल पर जारी रहे तो औद्योगिक दुर्घटनाओं के मामलों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
