हापुड़ (शिखर समाचार) स्वतंत्रता आंदोलन के अमर सपूतों की शौर्यगाथा को फिर से जीवंत करने और उनके बलिदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को 1942 शहीद स्मारक समिति के तत्वावधान में अतरपुरा चौराहे स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। कार्यक्रम में जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय एवं उपजिलाधिकारी सदर इला प्रकाश ने पहुंचकर शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। इस अवसर पर डीएम ने स्मारक परिसर का अवलोकन करते हुए समिति के पदाधिकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा की और आश्वासन दिया कि शीघ्र ही यहां एक भव्य और आकर्षक शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाएगा, जो नगर के गौरवशाली इतिहास का स्थायी प्रतीक बनेगा।
भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज में हापुड़ की कुर्बानी, 11 अगस्त 1942 को पांच वीरों ने दी थी शहादत
समिति अध्यक्ष सुरेश चंद ने कहा कि हापुड़ का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान किसी से छिपा नहीं है। यहां की जनता ने हर चरण में आंदोलन को गति दी और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटी। समिति के महामंत्री आशुतोष आजाद ने भावुक होकर कहा कि जो समाज अपने शहीदों को भूल जाता है, उसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। उन्होंने 11 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक घटना को स्मरण करते हुए बताया कि उस दिन अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में नगर में विशाल जुलूस निकाला गया था, जिसका उद्देश्य जनांदोलन को प्रखर करना और टाउन हॉल पर तिरंगा फहराना था। जब जुलूस अतरपुरा चौराहे पर पहुंचा, तो अंग्रेज अधिकारियों ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो निर्दयता से गोलियां बरसा दीं। इस निर्मम गोलीबारी में नगर के पांच साहसी नागरिक शहीद हो गए, जिनकी शहादत ने आंदोलन को और प्रबल बना दिया।
अतरपुरा चौराहे पर गूंजे देशभक्ति के नारे, नगरवासियों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
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कार्यक्रम में नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिकों में नरेंद्र कुमार मित्तल, डॉ. विपिन गुप्ता, राकेश वर्मा, आरडी शर्मा, राजीव अग्रवाल, दिनेश शर्मा, जगदीश प्रसाद आलू वाले, अनिल अग्रवाल, नरेश चंद शर्मा, हरिराज सिंह त्यागी, मिट्ठन लाल समेत अनेक लोग उपस्थित रहे और शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान अतरपुरा चौराहे पर देशभक्ति के गीतों और नारों से वातावरण गूंज उठा।
