नई दिल्ली में वैश्विक संसदीय विमर्श का महाकुंभ, 14 से 16 जनवरी तक होगा राष्ट्रमंडल संसदाध्यक्ष सम्मेलन

Rashtriya Shikhar
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Mahakumbh of Global Parliamentary Discussion in New Delhi, Commonwealth Parliament Heads Conference to be held from 14 to 16 January IMAGE CREDIT TO लोकसभा सचिवालय

नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारत की संसद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक संवाद का केंद्र बनने जा रही है। 14 से 16 जनवरी 2026 के बीच नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण वैश्विक संसदीय आयोजन की मेजबानी भारत कर रहा है, जिसमें राष्ट्रमंडल के 53 देशों की संसदों से जुड़े अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग लेंगे।

15 जनवरी को संसद में वैश्विक संसदीय सम्मेलन का उद्घाटन, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे संबोधन और अंतरराष्ट्रीय संवाद

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सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन 15 जनवरी 2026 को संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में होगा। उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, संसदीय परंपराओं तथा वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री विभिन्न देशों से आए संसदाध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों से संवाद करेंगे तथा सामूहिक चित्र भी लिया जाएगा।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। सम्मेलन के दौरान संसदीय निष्पक्षता, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और संसदों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। सीएसपीओसी का उद्देश्य संसदों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों की भूमिका को सशक्त करना, संसदीय लोकतंत्र के विभिन्न स्वरूपों की समझ बढ़ाना और संस्थागत विकास को प्रोत्साहित करना है।

तकनीक, जनभागीदारी और सुरक्षा पर मंथन

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सम्मेलन के अंतर्गत चार प्रमुख कार्यशाला सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, सामाजिक माध्यमों के प्रभाव, मतदान के बाद भी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की नई रणनीतियां तथा सांसदों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण जैसे विषय शामिल हैं। पहले दिन दो विषयों पर और अंतिम दिन शेष विषयों पर विचार विमर्श होगा।

इसके अतिरिक्त एक विशेष पूर्ण अधिवेशन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने में अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी। इस विशेष सत्र में लोक सभा अध्यक्ष मुख्य वक्तव्य देंगे।
लाल किले से संविधान सदन तक कार्यक्रमों की श्रृंखला
सम्मेलन से एक दिन पूर्व 14 जनवरी को स्थायी समिति की बैठक दिल्ली स्थित लाल किले के परिसर में आयोजित की जाएगी। बैठक से पहले प्रतिनिधियों के लिए लाल किले का भ्रमण और प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद लोक सभा अध्यक्ष की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा।
सम्मेलन के समापन के बाद परंपरा के अनुसार विदेशी प्रतिनिधियों के लिए 17 और 18 जनवरी को जयपुर भ्रमण का कार्यक्रम भी निर्धारित है, जहां भारतीय संस्कृति और विरासत से उन्हें रूबरू कराया जाएगा।

भारत की संसदीय कूटनीति को नई मजबूती

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भारत इससे पहले भी तीन बार इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है। वर्ष 1971, 1986 और 2010 में नई दिल्ली में सीएसपीओसी का सफल आयोजन हुआ था। 2010 में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था।

28वें सीएसपीओसी के आयोजन के साथ भारत एक बार फिर वैश्विक संसदीय संवाद में अपनी सक्रिय भूमिका को सुदृढ़ कर रहा है। यह सम्मेलन न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।

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