नई दिल्ली (शिखर समाचार)। अजित माधवराव गोपछड़े ने सोमवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े एक गंभीर मुद्दे, कम मूल्यवर्ग की नकली भारतीय मुद्रा के बढ़ते प्रसार को उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
छोटे मूल्यवर्ग के नकली नोटों का बढ़ता प्रसार
सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि देश में 200, 100, 50 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के जाली नोटों का प्रसार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। ये नकली नोट छोटे शहरों, कस्बों, गांवों और स्थानीय बाजारों में तेजी से फैल रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि इस समस्या का सबसे अधिक प्रभाव गरीब, किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और मध्यम वर्ग पर पड़ता है, क्योंकि ये वर्ग आज भी नकद लेन-देन पर अधिक निर्भर हैं। कई बार ईमानदार नागरिक अनजाने में जाली नोट स्वीकार कर लेते हैं और जब वे इसे बैंक या पुलिस के पास जमा करते हैं तो उनका पैसा जब्त हो जाता है, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
सप्त शक्ति रणनीति से समाधान का सुझाव
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सांसद ने नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए सरकार के समक्ष सप्त शक्ति रणनीति का सुझाव रखा। इसमें शामिल हैं:
- जाली नोट की सूचना देने वाले नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना
- रिपोर्टिंग प्रणाली को सरल बनाना
- केंद्रीय एजेंसियों की जांच में भूमिका बढ़ाना
- भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय की संयुक्त टास्क फोर्स गठित करना
- समय-समय पर नोटों के सुरक्षा फीचर्स बदलना
- सीमावर्ती क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करना
अंत में सांसद ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए नकली मुद्रा के प्रसार को रोकने और देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
