आईएमएस गाजियाबाद में ईरान अमेरिका तनाव पर विश्लेषणात्मक सत्र आयोजित, वैश्विक प्रभावों पर गहन मंथन

Rashtriya Shikhar
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Analytical session on Iran–US tensions held at IMS Ghaziabad, in-depth deliberation on global impacts IMAGE CREDIT TO इंस्टीट्यूट

गाजियाबाद (शिखर समाचार)। आईएमएस गाजियाबाद विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम परिसर में बुधवार को ‘ईरान-अमेरिका युद्ध: पेस्टल/स्वॉट विश्लेषण’ विषय पर एक शैक्षणिक सत्र का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के जटिल मुद्दों पर विद्यार्थियों ने गहराई से चर्चा की। कार्यक्रम का समन्वयन सीए सीएमए विक्रांत सिंह ने किया।

विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और विश्लेषण

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सत्र में दिव्यांश उपाध्याय, आयुष्मान चौधरी, अविका गोयल, कृष राय, श्रेया रानी और शुभम चौधरी ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने पेस्टल (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, विधिक और पर्यावरणीय) तथा स्वॉट (शक्तियाँ, कमजोरियाँ, अवसर और खतरे) जैसे विश्लेषणात्मक ढाँचों का उपयोग करते हुए ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की विभिन्न परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया।

वैश्विक प्रभावों पर गहन चर्चा

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चर्चा के दौरान ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव, ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में संभावित बाधाएं, अमेरिका की सैन्य शक्ति के मुकाबले ईरान की सामरिक स्थिति, तथा भारत जैसे देशों पर उत्पन्न होने वाले भू-राजनीतिक जोखिम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ता है।

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समापन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन

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समन्वयक सीए सीएमए विक्रांत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सैन्य शक्ति से संभव नहीं है, बल्कि कूटनीति, संवाद और बहुपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को जटिल अंतरराष्ट्रीय विषयों को समझने के लिए तार्किक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और श्रोताओं ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। पूरे सत्र के दौरान विद्यार्थियों में विषय के प्रति गहरी रुचि और जागरूकता देखने को मिली, जो उनके शैक्षणिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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