नई दिल्ली (शिखर समाचार)।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय संसद में श्रीलंका की संसद की ओवरसाइट कमेटी ऑन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड स्ट्रेटेजिक इश्यूज के अध्यक्ष एस. एम. मारिक्कर के नेतृत्व में आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने पर सार्थक चर्चा हुई।
भारत-श्रीलंका संबंधों पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रिश्ते हैं, जो उन्हें विशेष रूप से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध समय के साथ और अधिक प्रगाढ़ हुए हैं।
ओम बिरला ने भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत श्रीलंका की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हर संकट के समय एक विश्वसनीय प्रथम प्रत्युत्तरदाता (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) के रूप में खड़ा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संसदीय प्रक्रिया और मैत्री समूह का महत्व
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उन्होंने संसद के बजट सत्र की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दौरान देश के विकास से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होती है। संसदीय समितियाँ मिनी संसद की तरह कार्य करती हैं, जहाँ विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर ठोस और प्रभावी निर्णयों की रूपरेखा तैयार की जाती है।
ओम बिरला ने भारत-श्रीलंका संसदीय मैत्री समूह को द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया और आपसी सहयोग को और बढ़ाने पर बल दिया।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तारित करने पर जोर दिया, जिससे दोनों देशों के विकास में नई गति आएगी।
